विदेश की खबरें | वेप्स में क्या है? विषाक्त पदार्थ, भारी धातुएं, शायद रेडियोधर्मी पोलोनियम
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पर्थ (ऑस्ट्रेलिया), 11 अगस्त (द कन्वरसेशन) अगर आप मुझसे पूछते हैं कि ई-सिगरेट, डिस्पोजेबल वेप्स या ई-लिक्विड में क्या है तो मेरा संक्षिप्त उत्तर होगा ‘‘हम पूरी तरह से नहीं जानते।’’
पर्थ (ऑस्ट्रेलिया), 11 अगस्त (द कन्वरसेशन) अगर आप मुझसे पूछते हैं कि ई-सिगरेट, डिस्पोजेबल वेप्स या ई-लिक्विड में क्या है तो मेरा संक्षिप्त उत्तर होगा ‘‘हम पूरी तरह से नहीं जानते।’’
बाजार में विभिन्न स्वाद वाले इन उत्पादों की बढ़ती रेंज, गर्म करने पर या एक-दूसरे के साथ संपर्क में आने पर सामग्री में बदलाव और अपर्याप्त लेबलिंग के कारण इस जटिल प्रश्न का उत्तर दे पाना आसान नहीं है।
विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान, जिसमें मेरी अपनी टीम का शोध भी शामिल है, इस बारे में कुछ उत्तर देता है। लेकिन स्वास्थ्य प्रभावों को समझने से जटिलता का एक और स्तर जुड़ जाता है। स्वास्थ्य के लिए ई-सिगरेट का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है, जिसमें किस उपकरण या फ्लेवर का उपयोग किया जाता है और लोग उनका इस्तेमाल कैसे करते हैं।
इसलिए इसका इस्तेमाल करने वालों को यह नहीं पता होता है कि वे क्या सांस ले रहे हैं और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में निश्चित नहीं हो सकते हैं।
हम क्या जानते हैं?
इन जटिलताओं के बावजूद, विभिन्न प्रयोगशालाएं जो पता लगाती हैं उनमें कुछ समानताएं हैं।
सामग्री में निकोटीन, स्वाद बढ़ाने वाले रसायन और तरल पदार्थ में शामिल हैं - मुख्य रूप से प्रोपलीन ग्लाइकोल और ग्लिसरीन। चिंता की बात यह है कि हमें वाष्पशील कार्बनिक यौगिक, अति सूक्ष्म कण और कार्सिनोजेन (ऐसे तत्व जो कैंसर का कारण बन सकते हैं) भी मिलते हैं, जिनमें से कई के बारे में हम जानते हैं कि वे हानिकारक हैं।
हमारे पिछले शोध में यह भी पाया गया कि लगभग आधे ई-तरल पदार्थों में 2-क्लोरोफेनोल होता है जो उपयोगकर्ता पुनः भरने योग्य ई-सिगरेट के लिए खरीदते हैं। यह ऐसे रसायन का एक उदाहरण है जिसके होने का कोई वैध कारण नहीं है। विश्व स्तर पर इसे ‘‘सांस के जरिए शरीर में जाने पर हानिकारक’’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसकी उपस्थिति विनिर्माण के दौरान विषाक्तता के कारण होने की संभावना है।
पोलोनियम के बारे में क्या ख्याल है?
एक संभावित घटक जो हाल के हफ्तों में खबरों में रहा है, वह रेडियोधर्मी पोलोनियम-210 है। यह वही पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल 2006 में पूर्व रूसी जासूस अलेक्जेंडर लिटविनेंको की हत्या के लिए किया गया था। क्वींसलैंड सरकार अब इसके लिए वेप्स का परीक्षण कर रही है।
पोलोनियम-210 पारंपरिक सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों में पाया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि तंबाकू के पौधे इसे और अन्य रेडियोधर्मी पदार्थों को मिट्टी, हवा और उच्च-फॉस्फेट उर्वरक से अवशोषित करते हैं।
यह देखना अभी बाकी है कि ई-सिगरेट से निकलने वाले एरोसोल में पोलोनियम-210 पाया जाता है या नहीं। यह संभव है अगर ई-तरल पदार्थों में ग्लिसरीन पौधों से आता है और उन्हें उगाने के लिए समान उर्वरकों का उपयोग किया जाता है।
इन घटकों के अलावा, ई-सिगरेट उपकरण जिन सामग्रियों से बनाए जाते हैं वे हमारे शरीर में जा सकते हैं। ई-तरल पदार्थ और वेप्स का इस्तेमाल करने वालों के मूत्र, रक्त दोनों में आर्सेनिक, सीसा, क्रोमियम और निकल जैसे संबंधित पदार्थों और जहरीली धातुओं का पता लगाया जा सकता है।
ये पदार्थ गंभीर स्वास्थ्य जोखिम (जैसे कि कैंसरकारी) पैदा कर सकते हैं। वे ई-सिगरेट के कई हिस्सों से निकल सकते हैं, जिनमें हीटिंग कॉइल, तार और सोल्डर जोड़ शामिल हैं। सांस लेने योग्य एरोसोल बनाने के लिए ई-तरल पदार्थों को गर्म करने की प्रक्रिया भी क्षरण उत्पादों का उत्पादन करने के लिए उनकी रासायनिक संरचना को बदल देती हैं। इसमे शामिल है:
1) फॉर्मेल्डिहाइड (ऐसा पदार्थ जिसका इस्तेमाल शवों पर लेप लगाने के लिए किया जाता है)
2) एसीटैल्डिहाइड (एक प्रमुख पदार्थ जो शराब पीने के बाद हैंगओवर में योगदान देता है)
3) एक्रोलिन (प्रथम विश्व युद्ध में एक रासायनिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता था और अब एक खरपतवारनाशक के रूप में उपयोग किया जाता है)।
ये रसायन अक्सर ई-सिगरेट के नमूनों में पाए जाते हैं। हालांकि विभिन्न उपकरणों और नमूने कैसे एकत्र किए जाते हैं, इसके कारण मापे गए स्तर अध्ययनों के बीच व्यापक रूप से भिन्न होते हैं।
अक्सर, स्तर बहुत कम होते हैं, जिसके कारण वेपिंग के समर्थक यह तर्क देते हैं कि ई-सिगरेट तंबाकू धूम्रपान की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित है।
ई-सिगरेट उपयोगकर्ता निस्संदेह धूम्रपान न करने वाले की तुलना में अधिक विषाक्त पदार्थों और हानिकारक पदार्थों के संपर्क में आता है। जो लोग तंबाकू सिगरेट खरीदते हैं उन्हें धूम्रपान के खतरों के बारे में ढेर सारी चेतावनियों का सामना करना पड़ता है, जबकि वेपर्स में आमतौर पर चेतावनी नहीं होती है।
लेबलिंग की क्या स्थिति है ?
यह भी एक कारण है कि यह बताना असंभव है कि वेप्स में क्या है क्योंकि लेबल पर ना तो जानकारी रहती है ना ही चेतावनी।
अगर लेबल मौजूद भी रहता है तो उत्पाद के बारे में सटीक जानकारी नहीं मिलती है। ई-तरल पदार्थों की निकोटीन सांद्रता अक्सर लेबल पर दी गई मात्रा से काफी भिन्न होती है और ‘‘निकोटीन-मुक्त’’ ई-तरल पदार्थों में अक्सर निकोटीन होता है।
उत्पादों को ‘‘बेरी’’ या ‘‘तंबाकू’’ जैसे सामान्य स्वाद नामों से भी लेबल किया जाता है। लेकिन उपयोगकर्ता के लिए यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि उन ‘‘बेरी’’ या ‘‘तंबाकू’’ स्वादों को बनाने के लिए कौन से रसायनों को जोड़ा गया है या इन रसायनों में परिवर्तन जो हीटिंग और/या अन्य अवयवों और डिवाइस घटकों के साथ मिश्रण के दौरान हो सकते हैं।
‘‘बेरी’’ स्वाद को ही 35 से अधिक विभिन्न रसायनों से बनाया जा सकता है।
स्वाद बढ़ाने वाले रसायन ‘‘खाद्य श्रेणी’’ के हो सकते हैं या खाने के लिए सुरक्षित के रूप में वर्गीकृत किए जा सकते हैं। हालांकि, उन्हें खाने की तुलना में ई-तरल पदार्थों में मिलाना, गर्म करना और सांस लेना एक बहुत ही अलग प्रकार का जोखिम है।
एक उदाहरण बेन्जेल्डिहाइड (बादाम का स्वाद) है। जब यह सांस के माध्यम से शरीर के अंदर जाता है, तो यह फेफड़ों की कोशिकाओं के प्रतिरक्षा कार्य को खराब कर देता है।
बेन्जेल्डिहाइड ऑस्ट्रेलिया में आठ प्रतिबंधित ई-तरल सामग्रियों में से एक है। सूची इतनी छोटी है क्योंकि हमारे पास अन्य स्वाद देने वाले रसायनों के सेवन से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों और अन्य ई-तरल अवयवों के साथ उनकी अंतःक्रिया के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।
अगला कदम क्या है?
वेप्स के स्वास्थ्य जोखिमों का बेहतर आकलन करने के लिए, हमें इसके बारे में और अधिक जानने की आवश्यकता है :
1. क्या होता है जब स्वाद रसायनों को गर्म किया जाता है और सांस द्वारा अंदर लिया जाता है
2. विभिन्न ई-तरल अवयवों के बीच परस्पर क्रिया
3. ई-तरल पदार्थों में अन्य कौन से नुकसान पहुंचाने वाले तत्व मौजूद हो सकते हैं
4. ई-सिगरेट में नए, संभावित रूप से हानिकारक पदार्थ।
अंत में, हमें इस बारे में और अधिक जानने की आवश्यकता है कि लोग ई-सिगरेट का इस्तेमाल कैसे करते हैं ताकि हम वास्तविक दुनिया में स्वास्थ्य जोखिमों को बेहतर ढंग से समझ सकें और उनकी मात्रा निर्धारित कर सकें।
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