क्या है जॉम्बी फायर और कितनी खतरनाक है ये आग?

कनाडा में अभी सर्दियां अपने मध्यवर्ती पड़ाव पर हैं, लेकिन यहां जंगल में आग की 150 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

कनाडा में अभी सर्दियां अपने मध्यवर्ती पड़ाव पर हैं, लेकिन यहां जंगल में आग की 150 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इनमें से कई जॉम्बी फायर तो 2023 से ही सुलग रही हैं. गर्मी के मौसम में इसका कैसा असर दिखेगा?जीवों की तरह सर्दी के मौसम में आग भी सुप्त अवस्था में जाकर महीनों तक जमीन के भीतर सुलगती रह सकती है. आग की ऐसी घटनाओं को होल्डओवर या जॉम्बी फायर कहते हैं. इनमें आग की लपटें तो नहीं उठतीं, लेकिन जमीन से धुएं के गुबार उठते रहते हैं.

जॉम्बी फायर कहां और कैसे भड़कती है?

जॉम्बी आग मुख्य रूप से शीतोष्ण शंकुधारी वनों में लगती है. ऐसे इलाके कनाडा, अलास्का, उत्तरी यूरोप या साइबेरिया तक फैले हुए हैं. इन इलाकों की जमीन ऐसी वनस्पतियों की मोटी परत से ढकी होती है, जहां आग आसानी से लग जाती है. यहां की मिट्टी में भी पीट की प्रचुरता होती है. पीट एक प्रकार की कोयले की पूर्व अवस्था है, जिसकी प्रकृति अत्यंत ज्वलनशील होती है.

ऐसे में जब इन जंगलों में आग भड़कती है, तो उसे जमीन के नीचे फैलने में ज्यादा समय नहीं लगता और ऐसी आग लंबे समय तक सुलगती रहती है. खासतौर पर जब जमीन सूखी हुई हो, तो आग के सुलगने का सिलसिला खासा लंबा खिंच सकता है. यहां तक कि बर्फबारी के दौरान भी खास राहत नहीं मिलती क्योंकि आग को बुझाने के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होती. अगर काफी मात्रा में पीट और वनस्पतियों के अवशेष मौजूद हों, तो ऐसी आग पूरी सर्दियों के दौरान भड़की रह सकती है.

जलवायु परिवर्तन और जॉम्बी फायर का रिश्ता

जंगल की आग शीतोष्ण शंकुधारी जंगलों में एक प्राकृतिक पारिस्थितिकीय चक्र है. इसके कारण वनों के पुनर्जीवन की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है. असल में वनस्पतियों के अवशेष का ढेर ऐसी मोटी परत बना लेता है, जिससे मिट्टी तक जरूरी पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते हैं. इसलिए आग के कारण जरूरी पोषक तत्वों का प्रवाह सुनिश्चित होता है. साथ ही आग से निकली राख का ढेर भी बीजों के अंकुरित होकर आसानी से बाहर निकलने की बेहतर जमीन तैयार करता है.

लेकिन इंसानों द्वारा बड़े पैमाने पर जलाए जा रहे जीवाश्म ईंधनों ने पृथ्वी के तापमान को खासा गर्म कर दिया है. इससे सूखे और गर्मी की अवधि बढ़ती जा रही है. पिछले 43 साल में बाकी दुनिया के मुकाबले आर्कटिक क्षेत्र के तापमान में चार गुना अधिक बढ़ोतरी हुई. गर्मी और सूखे से न केवल वसंत और गर्मियों के दौरान जंगल में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं, बल्कि जॉम्बी फायर भी लंबे समय तक जमीन के भीतर सुलगती रहती है.

शोधकर्ताओं ने अमेरिकी प्रांत अलास्का और कनाडा के शीतोष्ण शंकुधारी वनों पर 2021 में एक अध्ययन किया था. इसमें गर्मियों की तेज हुई तपिश और जॉम्बी फायर की बढ़ती घटनाओं में एक संबंध पाया गया. उदाहरण के तौर पर, साल 2024 की शुरुआत में पश्चिमी कनाडा में जॉम्बी फायर की घटनाओं में से 10 से 12 गुना तक की वृद्धि देखी गई.

2023 की गर्मियां कनाडा के इतिहास में सबसे भारी साबित हुईं. इस दौरान 1.8 करोड़ हेक्टेयर वन संपदा और घास जलकर खाक हो गई. इसके चलते करीब दो लाख लोगों को पलायन करना पड़ा. चूंकि जॉम्बी फायर से कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है, जिसका जलवायु परिवर्तन पर भी असर पड़ता है.

सर्दियों में लगी आग का वसंत और गर्मी कैसा असर

ऑक्सीजन की कमी के कारण जॉम्बी फायर जमीन के भीतर धीरे-धीरे फैलती है. लेकिन अगर बर्फ डालकर इसपर अंकुश ना लगाया जाए, तो इस आग के कारण गर्मियों के दौरान जंगल में आग फैलने की आशंका कहीं ज्यादा बढ़ जाती है. वसंत के मौसम में तो हवा का एक झोंका ही आग को और भड़काने के लिए पर्याप्त होता है. साथ ही, जंगल में आग लगने की घटनाएं गर्मियों से पहले वसंत में ही शुरू होने का अंदेशा भी बढ़ जाता है. वसंत में जमीन सूखी हो या बर्फबारी कम हो, तो जोखिम और बढ़ जाता है.

जमीनी स्तर पर ऐसी आग को रोकना काफी मुश्किल है. चूंकि ये बड़ी सघन चीजों के दायरे में फैलती है, तो इसे बुझाने के लिए केवल पानी ही काफी नहीं होता. बहुत संभावना है कि पानी, आग के पूरे इलाके में ना घुस पाए. इतना ही नहीं, यह भी मुमकिन है कि पानी अपने पीछे दहकती हुई ऐसी चीजें भी छोड़ जाए जो फिर से आग भड़का दें. जॉम्बी फायर को कारगर रूप से बुझाने के लिए जमीन के ऊपर जमा हुई तमाम परतों को हटाना जरूरी है.

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