देश की खबरें | प.बंगाल का भाजपा नेता की मृत्यु को ‘राजनीतिक हत्या’ बताने वाले आरोपों से न्यायालय में इंकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पश्चिम बंगाल सरकार ने उच्चतम न्यायालय में इन आरोपों से इंकार किया है कि भाजपा नेता देबेन्द्र नाथ रॉय की मृत्यु ‘राजनीतिक हत्या’ थी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, पांच जनवरी पश्चिम बंगाल सरकार ने उच्चतम न्यायालय में इन आरोपों से इंकार किया है कि भाजपा नेता देबेन्द्र नाथ रॉय की मृत्यु ‘राजनीतिक हत्या’ थी।

रॉय का शव पिछले साल जुलाई में उनके घर के पास ही लटका मिला था। राज्य सरकार ने दावा किया कि इस घटना की तत्परता के साथ राज्य की सीआईडी ने जांच की थी।

भाजपा नेता की मौत की घटना का मामला सीबीआई को सौंपने के लिये उच्चतम न्यायालय में दायर याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने जवाब में यह दावा किया है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ के समक्ष मंगलवार को यह मामला सुनवाई के लिये सूचीबद्ध था। याचिकाकर्ता शशांक शेखर झा और सैवियो रोड्रिग्स ने राज्य सरकार के हलफनामे पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिये समय देने का पीठ से अनुरोध किया।

इस पर पीठ ने मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में दावा किया कि प्रदेश की सीआईडी ने शिकायत के सभी पहलुओं की जांच की और राय की मौत के कारणों का पता लगाया है तथा इस संबंध में सक्षम अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया गया है।

राज्य सरकार की ओर से मालदा जोन के सीआईडी के पुलिस उपाधीक्षक द्वारा दाखिल हलफनामे में इस बात से इंकार किया गया कि देबेन्द्र नाथ रॉय की मौत एक राजनीतिक हत्या थी या इसमें सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया या इसमें उसकी किसी भी तरह की भूमिका थी।

राय का शव 13 जुलाई, 2020 को उनके घर के निकट ही उत्तरी दिनाजपुर जिले के हेमताबाद में लटका मिला था। वह 2016 में मार्क्सवादी पार्टी के टिकट पर पश्चिम बंगाल विधान सभा के लिये विधायक निर्वाचित हुये थे और बाद में 2019 में भाजपा में शामिल हो गये थे।

राज्य सरकार ने याचिका खारिज करने का अनुरोध करते हुये याचिकाकर्ताओं के इन आरोपों को झूठा और निराधार करार दिया है कि देबेन्द्र नाथ रॉय की पहले हत्या की गयी और इसके बाद उनका शव लटका दिया गया।

हलफनामे के अनुसार 14 जुलाई को ही इस मामले की जांच रायगंज पुलिस से सीआईडी को सौंप दी गयी थी जिसने इसके सभी पहलुओं की जांच के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।

हलफनामे में कहा गया है कि मृतक की पत्नी ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौपने का अनुरोध करते हुये कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। लेकिन उच्च न्यायालय ने याचिका का यह कहते हुये निस्तारण कर दिया था कि उसे जांच एजेन्सी के काम में किसी प्रकार का दुराग्रह नजर नहीं आया।

अनूप

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