देश की खबरें | पृथ्वी की उत्पत्ति के समय से ही संभवत: जल मौजूद था : अध्ययन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पृथ्वी पर जल किसी दूरस्थ धूमकेतु या उल्कापिंड से नहीं आया बल्कि यह इस ग्रह की उत्पत्ति के समय से ही था और यह आंतरिक सौर मंडल के पदार्थों से आया था। यह दावा एक नये अध्ययन में किया गया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

लंदन, 31 अगस्त पृथ्वी पर जल किसी दूरस्थ धूमकेतु या उल्कापिंड से नहीं आया बल्कि यह इस ग्रह की उत्पत्ति के समय से ही था और यह आंतरिक सौर मंडल के पदार्थों से आया था। यह दावा एक नये अध्ययन में किया गया है।

फ्रांस स्थित डी लॉरिया विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि एक तरह के उल्कापिंड, जिसे एनोस्टेटाइट कोन्ड्राइट कहा जाता है, में पृथ्वी पर पाए जाने वाले समुद्री जल को तीन गुना करने के बराबर हाइड्रोजन है।

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वैज्ञानिक ने ध्यान दिलाया कि एनोस्टेटाइट कोन्ड्राइट पूरी तरह से आंतरिक सौर प्रणाली में मौजूद तत्वों से बना हुआ और वे वही पदार्थ हैं जिससे मूल रूप से पृथ्वी का निर्माण हुआ था।

जर्नल साइंस में प्रकाशित शोधपत्र के मुख्य लेखक लॉरेट पियानी ने कहा, ‘‘हमारी खोज दिखाती है कि पृथ्वी का निर्माण जिन पदार्थों से हुआ उन्हीं ने पृथ्वी पर जल की उपस्थिति में योगदान दिया।’’

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पियानी ने कहा, ‘‘ ठोस ग्रहों के निर्माण के समय हाइड्रोजन युक्त पदार्थ सौर मंडल के आंतरिक हिस्सें में मौजूद थे। हालांकि, तापमान जल के द्रवीकरण होने से कहीं अधिक था।’’

शोधकर्ताओं ने कहा कि यह खोज आश्चर्यजनक है क्योंकि माना जाता है कि पृथ्वी का निर्माण शुष्क पदार्थों से हुआ था।

उन्होंने कहा कि उल्कापिंड से संकेत मिलता है कि जल दूर से धरती पर नहीं आया।

अमेरिका स्थित वाशिंगटन विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता लायनेल वाचर ने कहा, ‘‘मेरे लिए इस खोज का सबसे रोचक हिस्सा एनोस्टेटाइट कोन्ड्राइट है जिसे लगभग ‘शुष्क’ माना जाता था, लेकिन अविश्वसनीय तरीके से उसपर बहुत अधिक मात्रा में पानी मौजूद है।’’

उल्लेखनीय है कि एनोस्टेटाइट कोन्ड्राइट दुलर्भ उल्कापिंड है और कुल ज्ञात उल्कापिंडों में केवल दो प्रतिशत इस श्रेणी के हैं। हालांकि, इनकी पृथ्वी से आइसोटोपिक समानता है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक एनोस्टेटाइट कोन्ड्राइट में पृथ्वी के समान ही ऑक्सीजन, टाइटेनियम और कैलसियम आइसोटोप मौजूद हैं और अध्ययन में पता चला कि हाइड्रोजन और नाइट्रोजन की उपस्थिति भी पृथ्वी के समान ही है।

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