ताजा खबरें | वक्फ़ विधेयक असंवैधानिक और अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ : तृणमूल

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस ने वक्फ़ संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि यह विधेयक संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करने के साथ ही राज्यों के अधिकारों को भी प्रभावित करता है।

नयी दिल्ली, तीन अप्रैल राज्यसभा में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस ने वक्फ़ संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि यह विधेयक संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करने के साथ ही राज्यों के अधिकारों को भी प्रभावित करता है।

उच्च सदन में वक्फ़ संशोधन विधेयक, 2025 पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस सदस्य मोहम्मद नदीमुल हक ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ मुसलमानों से ही नहीं बल्कि पूरे देश से जुड़ा है और यह मौलिक अधिकारों का हनन भी करता है।

उन्होंने इस विधेयक को गैर-जरूरी कदम बताया और कहा कि यह असंवैधानिक और अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ है।

हक ने कहा कि संविधान कोई किताब नहीं बल्कि देश को रास्ता दिखाने वाला है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संघवाद की भावना के खिलाफ भी है और इसमें सुधारों के नाम पर परंपराओं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिए राज्यों के अधिकारी छीने जा रहे हैं।

तृणमूल सदस्य ने कहा कि इस विधेयक के प्रावधानों से स्पष्ट है कि वक्फ मामलों में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ेगा और सरकारी अधिकारियों को व्यापक अधिकार दिए गए हैं।

उन्होंने इसे भेदभावकारी बताते हुए कहा कि कम से कम पांच साल तक मुस्लिम धर्म का अनुसरण करने वाले ही वक्फ के कामकाज से जुड़ सकेंगे। उन्होंने सवाल किया कि यह कौन तय करेगा कि अमुक व्यक्ति पांच साल से मुस्लिम धर्म का भलीभांति अनुसरण कर रहा है या नहीं।

हक ने कहा कि इस विधेयक में संपत्ति के दस्तावेजों पर भी जोर दिया गया है लेकिन कई संपत्ति पीढ़ियों से हैं और मौखिक आधार पर दिए गए थे, वैसे मामलों में दस्तावेज कैसे उपलब्ध होंगे। उन्होंने विधेयक को सांस्कृतिक विद्वेष फैलाने वाला भी बताया और इस बात पर आपत्ति जतायी कि वक्फ बोर्ड और परिषद में गैर-मुस्लिम भी शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक के प्रावधानों से अदालतों पर भी बोझ बढ़ेगा जहां पहले ही बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सदस्य टी शिवा ने भी विधेयक का तीखा विरोध किया और कहा कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में विपक्षी सदस्यों द्वारा की गयी किसी भी सिफारिश को विधेयक में शामिल नहीं किया गया है।

शिवा ने भी दावा किया कि यह विधेयक कानूनी और संवैधानिक रूप से उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक एक समुदाय के खिलाफ है।

द्रमुक सदस्य ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह विपक्ष की बातों को नहीं सुनती और यह विधेयक वक्फ संपत्ति का प्रबंधन अपने हाथ में लेने का प्रयास है।

शिवा ने इसे संविधान विरोधी बतााया और कहा कि यह उच्चतम न्यायालय में रद्द हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ‘‘सबका साथ सबका विकास’’ की बात तो करती है लेकिन वह पूरी तरह से मुसलमानों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण मुसलमानों में भय का माहौल है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या देश के विकास में मुसलमानों का कोई योगदान नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सरकार देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है।

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