ताजा खबरें | मोदी के नेतृत्व में जैसे-जैसे कल्याणकारी योजनाएं लागू होंगी, मतदान प्रतिशत बढ़ेगा: सरकार

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. देश में अनिवार्य मतदान को अव्यावहारिक बताते हुए सरकार ने शुक्रवार को आशा जताई कि जैसे जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कल्याणकारी योजनाएं लागू होती जायेंगी, देश में होने वाले चुनावों में मतदान प्रतिशत बढ़ता जायेगा ।

नयी दिल्ली, पांच अगस्त देश में अनिवार्य मतदान को अव्यावहारिक बताते हुए सरकार ने शुक्रवार को आशा जताई कि जैसे जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कल्याणकारी योजनाएं लागू होती जायेंगी, देश में होने वाले चुनावों में मतदान प्रतिशत बढ़ता जायेगा ।

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल ने लोकसभा में कहा कि एक तरफ स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने का श्रेय लेने वाली कांग्रेस में अनेक बड़े नेताओं की मौजूदगी के बावजूद 1950 के दशक से लेकर 2014 तक वह बड़ी संख्या में मतदाताओं को वोट डालने के लिए प्रोत्साहित नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि जबकि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और फिर उनके नेतृत्व में देश में हुए विकास कार्यों के कारण मतदान प्रतिशत में 9 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई।

उन्होंने भाजपा सांसद जनार्दन सिग्रीवाल के गैर-सरकारी विधेयक ‘अनिवार्य मतदान विधेयक, 2019’ पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए यह बात कही।

विधि राज्य मंत्री ने भाजपा सांसद और सदन को आश्वासन दिया कि सरकार कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के साथ मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रयास करेगी। मंत्री के अश्वासन पर संतोष जताते हुए सिग्रीवाल ने अपने विधेयक को वापस ले लिया।

गत 21 जून 2019 को सदन में प्रस्तुत इस गैर-सरकारी विधेयक पर पिछले तीन वर्षों में विभिन्न मौकों पर हुई चर्चा के जवाब में बघेल ने कहा कि विधेयक में प्रस्तावित प्रावधानों के मुताबिक आयोग द्वारा सभी मतदाताओं की ‘इंच-इंच’ पर सुरक्षा सुनिश्चित करना, मतदान नहीं करने वालों पर अर्थदंड लगाना, मतदान नहीं करने वालों की सूची भेजना और मतदान करने वालों को केंद्र सरकार की नौकरियों में जगह देना आदि व्यावहारिक नहीं है।

बघेल ने कहा कि दुनियाभर में फिलीपीन, स्पेन, सिंगापुर, थाइलैंड, तुर्की, वेनेजुएला, बुल्गारिया, कांगो, चिली, साइप्रस, इक्वाडोर, मिस्र और फिजी जैसे कई देशों में अनिवार्य मतदान का प्रयोग किया गया, लेकिन इनमें से अनेक देशों को तत्काल समझ आ गया कि कुछ विषमताएं पैदा हुई हैं जिसके बाद उन्होंने इसे रोक दिया।

उन्होंने कहा कि हमें संविधान में उल्लेखित मौलिक कर्तव्य और नैतिक कर्तव्य के बीच अंतर का भी ध्यान रखना होगा।

बघेल ने कहा कि मतदान एक अधिकार है, कर्तव्य नहीं है और इसलिए मतदाताओं को वोट डालने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि मतदान को आधार कार्ड से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

बघेल ने कहा कि 2009 में 58 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले थे, लेकिन 2014 में जब नरेंद्र मोदी को भाजपा के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया तो उनकी सरकार बनने की उम्मीद में ही 8.4 प्रतिशत अधिक मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया और मतदान 66 प्रतिशत से अधिक हो गया।

उन्होंने कहा कि 2019 के चुनाव में यह 1.1 प्रतिशत और बढ़ गया तथा इस सरकार द्वारा आयुष्मान भारत, उज्ज्वला, शौचालय निर्माण, छात्रवृत्ति, पेंशन आदि अनेक योजनाओं के लागू करने के साथ ही मतदान प्रतिशत और बढ़ने की आशा है।

बघेल ने कहा, ‘‘2024 का चुनाव आएगा तो तमाम योजनाएं पूरी हो चुकी होंगी और मतदान प्रतिशत निश्चित रूप से बढ़ेगा’’

उन्होंने कहा कि देश की जनता, राष्ट्रीय विधि आयोग और न्यायपालिका भी अनिवार्य मतदान की नीति से सहमत नहीं है।

मंत्री ने कहा कि पहले भी कई समितियों ने अनिवार्य मतदान पर गंभीरता से विचार करने के बाद इसे असंभव माना है।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रताजंत्र में मतदान के अधिकार में ही मतदान नहीं करने का अधिकार भी निहित रहता है।’’

बघेल ने कहा कि यदि व्यक्ति की अंतरात्मा उसे मतदान करने की अनुमति नहीं देती हो तो वह यह निर्णय ले सकता है और यदि वह जन प्रतिनिधि के कार्यों से संतुष्ट नहीं हो तो मतदान का बहिष्कार कर सकता है।

बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने देश को आजादी दिलाने का श्रेय लेने की कोशिश की लेकिन उसके अनेक बड़े नेता भी इतने सालों में मतदान प्रतिशत अधिक कराने में सफल नहीं रहे, वहीं प्रधानमंत्री मोदी की सरकार आने की उम्मीद और उन्हें दोबारा सरकार में लाने के लिए ज्यादा लोगों ने मतदान किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने यदि 50 के दशक से लोक कल्याणकारी योजनाओं को चलाया होता और लागू किया होता तो इस तरह के विधेयक की जरूरत नहीं पड़ती।

इसके बाद, सिग्रीवाल ने कहा कि सरकार को मतदान के लिए जागरुकता फैलाने पर और रैलियों, प्रचार आदि पर खर्च को कम करके उसे मतदाताओं की सुविधाओं पर व्यय करना चाहिए।

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