फोल्क्सवागन में जा सकती हैं 1,00,000 नौकरियां: रिपोर्ट
जर्मनी की कार निर्माता कंपनी फोल्क्सवागन की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं.
जर्मनी की कार निर्माता कंपनी फोल्क्सवागन की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब रिपोर्ट आई है कि 2030 तक कंपनी में एक लाख नौकरियां जाने की कगार पर हैं.जर्मनी की दिग्गज कार निर्माता कंपनी फोल्क्सवागन ने एलान किया है कि कंपनी में साल 2030 तक 50 हजार और नौकरियों की कटौती की जाएगी. अकेले फोल्क्सवागन ब्रैंड में 2030 तक 35 हजार नौकरियों में कटौती की जानी है. हालांकि, इससे अलग सूत्रों का हवाला देते हुए, जर्मनी की पत्रिका 'मैनेजर मैगजीन' ने रिपोर्ट दी थी कि दुनियाभर में फोल्क्सवागन में एक लाख तक नौकरियां जा सकती हैं, जो पहले की योजना से दोगुनी हैं. इसमें यह भी कहा गया था कि जर्मनी में चार प्लांट बंद होने की कगार पर हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन योजनाओं पर 9 जुलाई को सुपरवाइजरी बोर्ड चर्चा करेगा.
रिपोर्ट में बताया गया है कि जो चार प्लांट बंद हो सकते हैं, वे हनोवर, त्स्विकाउ और एमडेन के प्लांट हैं. साथ ही नेकारसुल्म में ऑउडी की फैक्ट्री इस लिस्ट में शामिल है. रिपोर्ट में इन उपायों के लिए किसी तय तारीख का जिक्र नहीं किया है. रिपोर्ट के अनुसार, इन्हें आने वाले कुछ सालों में बंद किया जा सकता है.
खत्म नहीं हो रहा फोल्क्सवागन का मुश्किल दौर
कंपनी के सीईओ ओलिवेर ब्लूम ने इस हफ्ते हुई कंपनी की सालाना बैठक में इस बात पर मोहर लगाई है. उन्होंने शेयरधारकों को बताया कि फोल्क्सवागन की स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. साथ ही उन्होंने कहा कि वाहन उद्योग के हालात 2026 में और खराब हो गए हैं. ब्लूम ने बताया कि 2026 के आखिर तक कार्यबल में पहले ही 19 हजार की कटौती की जाएगी.
ब्लूम ने स्पष्ट किया कि लगभग 28 हजार कर्मचारियों के अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ने यानी वॉलंटरी डिपार्चर्स पर पहले ही सहमति बन चुकी है. फोल्क्सवागन ने बताया है कि कंपनी अपने पुर्नगठन की योजना पर भी काम कर रही है. लेकिन साथ ही कहा है कि वह इस चरण में लागत में और कटौती के अधिक कड़े उपायों पर विस्तार से टिप्पणी नहीं करना चाहती है.
ब्लूम ने कहा, "हमारा बिजनेस मॉडल दशकों तक सफल रहा है लेकिन आज काम नहीं कर रहा है. हमें इसे और विकसित करना होगा." इसके साथ ही कंपनी ने आने वाले समय में कई बड़े बदलावों की भी घोषणा की है. ब्लूम के मुताबिक फोल्क्सवागन का लक्ष्य इस दशक के अंत तक दुनिया की सबसे आकर्षक कार निर्माता बनना है, जिसमें कपंनी को बिक्री पर आठ से 10 फीसदी के बीच रिटर्न मिले. उन्होंने तर्क दिया कि हाल ही में सामने आए इलेक्ट्रिक आईडी पोलो जैसे नए मॉडल दिखाते हैं कि ब्रैंड सही रास्ते पर है और एक बार फिर प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे है. लेकिन नए मॉडलों से कंपनी पर्याप्त पैसा नहीं कमा पा रही है.
उन्होंने यह भी कहा कि 2025 में कंपनी की जर्मन साइटों पर फैक्ट्री लागत में 20 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है. ब्लूम ने प्लांट की क्षमता को और कम करने की अपनी योजनाओं की भी पुष्टि की. 2030 तक, वह अपने यूरोपीय प्लांटों की क्षमता को और पांच लाख वाहनों तक कम करना चाहते हैं. यह 2028 तक दस लाख गाड़ियों की पहले से चल रही कटौती के अतिरिक्त है. चीन में सालों से घटती बिक्री और इलेक्ट्रिक कारों से मिलने वाले कम मुनाफे के कारण कंपनी पहले से ही भारी दबाव में है, और रही-सही कसर पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के लागू किए गए टैरिफ ने पूरी कर दी.
"जर्मनी के लिए विनाशकारी"
ट्रेड यूनियन 'आईजी मेटाल' और 'फोल्क्सवागन वर्कर्स काउंसिल' ने जर्मन कार निर्माता कंपनी में संभावित लागत-कटौती की योजनाओं की रिपोर्टों की कड़ी आलोचना की है. संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाया गया, तो वे उन्हें रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे. वहीं, संभावित रूप से बंद होने वाले प्लांटों में से एक राज्य सैक्सनी के मुख्यमंत्री ने फोल्क्सवागन में संभावित लागत-कटौती उपायों पर चिंता व्यक्त की.
सैक्सनी के मुख्यमंत्री मिखाएल क्रेचमर ने कहा, "ऐसा होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. जर्मनी खुद को बर्बाद होने की अनुमति नहीं दे सकता." क्रेचमर ने इस बात पर जोर दिया कि फोल्क्सवागन जर्मनी की ब्रांड पहचान का हिस्सा है, अगर यह कंपनी हार मान लेती है, तो यह पूरे देश के लिए विनाशकारी होगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 28, 2026 12:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

