देश की खबरें | विश्वनाथ की फिल्म ‘शंकरभर्नम’ ने तेलुगू फिल्मोद्योग में एक नये दौर की शुरुआत की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. फिल्मकार के. विश्वनाथ की 1980 में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘शंकरभर्नम’ ने तेलुगू सिनेमा जगत में हलचल मचा दी थी। फिल्म समीक्षकों और दर्शकों ने एक स्वर में इसकी सराहना की थी।

हैदराबाद, तीन फरवरी फिल्मकार के. विश्वनाथ की 1980 में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘शंकरभर्नम’ ने तेलुगू सिनेमा जगत में हलचल मचा दी थी। फिल्म समीक्षकों और दर्शकों ने एक स्वर में इसकी सराहना की थी।

साथ ही, इस फिल्म ने ‘टॉलीवुड’ (तेलुगू सिनेमा उद्योग) को ‘शंकरभर्नम’ से पहले और इसके बाद, दो दौर के रूप में विभाजित कर दिया।

फिल्म उद्योग में एक ‘साउंड आर्टिस्ट’ के रूप में अपना सफर शुरू करने वाले विश्वनाथ ने हिंदी में भी सुपरहिट फिल्म बनाई, जिनमें ‘कामचोर’, ‘संजोग’ और ‘जाग उठा इंसान’ शुमार हैं।

प्रख्यात फिल्मकार ने बृहस्पतिवार रात अंतिम सांस ली। उनका जन्म 1930 में आंध्र प्रदेश के रेपाल्ले में हुआ था। विश्वनाथ को ‘कलातपस्वी’ का दर्जा दिया गया। स्वाभाविक है कि ‘शंकरभर्नम’ के बाद उन्हें शोहरत और पुरस्कार भी मिले। ठीक 43 साल पहले यह फिल्म रिलीज हुई थी।

हालांकि, उन्हें कई धाराओं की फिल्म में काम करने का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने केवल वही फिल्म बनाने का फैसला किया, जो उनकी विचारधारा के अनुरूप थे। उनकी फिल्म कला एवं संस्कृति के इर्द-गिर्द केंद्रित रही।

फिल्म उद्योग में करीब छह दशक के अपने करियर में उन्होंने 50 से अधिक फिल्म का निर्देशन किया। तेलुगू सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें 1991 में प्रतिष्ठित रघुपति वेंकैया पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के अलावा उन्हें 1992 में पद्म श्री से नवाजा गया। उनके नाम पांच राष्ट्रीय पुरस्कार, 20 नंदी पुरस्कार (आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा दिया जाने वाला) और ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ सहित 10 फिल्मफेयर पुरस्कार भी हैं।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के अनुसार, विश्वनाथ एक विरले विशिष्ट फिल्म निर्देशक थे जिन्होंने एक साधारण कहानी चुनी और अपनी शानदार प्रतिभा की बदौलत उसे रुपहले पर्दे पर एक शास्त्रीय फिल्म में तब्दील कर दिया।

उस दौर में ‘एक्शन हीरो’ की छवि रखने वाले चिरंजीवी और वेंकटेश जैसे अभिनेताओं ने विश्वनाथ की फिल्म में विभिन्न किरदार निभाएं।

विश्वनाथ तमिल और हिंदी सिनेमा में भी सक्रिय रहे हैं।

उन्होंने 1965 में ‘आत्मा गोवरावम’ फिल्म के साथ निर्देशन की अपनी पारी की शुरूआत की और सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए नंदी पुरस्कार प्राप्त किया।

फिल्मकार ने इसके बाद ‘चेल्लेली कपुरम’, ‘ओ सीता कथा’, ‘जीवन ज्योति’ और ‘सारदा’ का निर्देशन किया।

उन्होंने तेलुगू फिल्म ‘स्वराभिशेकम’, ‘नरसिम्हा नायडू’, ‘लक्ष्मी नरसिम्हा’ के अलावा ‘कुरुतिपुनल’ व अन्य फिल्म में अभिनय भी किया।

तेलुगू फिल्म प्रोड्यूसर्स काउंसिल ने कहा कि दिवंगत आत्मा के सम्मान में ‘टॉलीवुड’ में शुक्रवार को अवकाश घोषित किया गया है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश में बड़ा हादसा, काकीनाडा जिले में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 10 से अधिक की मौत और कई घायल; VIDEO

West Indies Women vs Sri Lanka Women, 1st T20I Match Preview: आज वेस्टइंडीज महिला बनाम श्रीलंका महिला के बीच खेला जाएगा पहला टी20 मुकाबला, मैच से पहले जानिए हेड टू हेड रिकॉर्ड्स, मिनी बैटल, स्क्वाड समेत सभी डिटेल्स

Israel-Iran War: ईरान में बड़े सैन्य अभियानों के बीच एयर इंडिया ने मध्य पूर्व की सभी उड़ानें रद्द की, यात्रियों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

Australia Women vs India Women, 3rd ODI 2026 Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा ऑस्ट्रेलिया महिला बनाम भारत महिला के बीच तीसरा वनडे? इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी

\