देश की खबरें | रामनवमी पर हिंसा कानून और संविधान की ‘धज्जियां उड़ने’ के अलावा कुछ नहीं: माकपा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रामनवमी पर हिंसा की घटनाओं को कानून और देश के संविधान की ‘‘धज्जियां उड़ना’’ बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘चुप्पी’ इस चिंता को और बढ़ा देती है कि इन घटनाओं को सत्ता में बैठे लोगों का संरक्षण प्राप्त है।

नयी दिल्ली, 12 अप्रैल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रामनवमी पर हिंसा की घटनाओं को कानून और देश के संविधान की ‘‘धज्जियां उड़ना’’ बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘चुप्पी’ इस चिंता को और बढ़ा देती है कि इन घटनाओं को सत्ता में बैठे लोगों का संरक्षण प्राप्त है।

माकपा के पोलित ब्यूरो ने एक बयान में अपनी इकाइयों से उचित गतिविधियों के माध्यम से शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए काम करने का आह्वान किया। बयान में कहा गया, ‘‘हिंसा की घटनाएं और कुछ नहीं बल्कि भारत के कानून और संविधान की धज्जियां उड़ने जैसी हैं। सात राज्यों में इस तरह की घटनाएं होने के बावजूद प्रधानमंत्री की चुप्पी इस चिंता को और बढ़ा देती है कि इन घटनाओं को सत्ता में बैठे लोगों का संरक्षण प्राप्त है।’’

माकपा ने कहा कि मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड जैसे कई राज्यों में रामनवमी के अवसर पर जुलूस के दौरान सांप्रदायिक हिंसा गहरी चिंता का विषय है।

बयान में कहा गया, ‘‘माकपा संघ परिवार द्वारा सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक त्योहारों के इस्तेमाल की निंदा करती है। पार्टी सभी वर्गों के लोगों से शांति बनाए रखने और धर्म के नाम पर लोगों को विभाजित करने की इच्छा रखने वालों के उद्देश्य को विफल करने की अपील करती है।’’

माकपा ने कहा, ‘‘खरगोन में इस तरह की यह पहली घटना हुई है और यह कोई संयोग नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल शर्मा क्षेत्र में मौजूद थे जो राष्ट्रीय राजधानी में सांप्रदायिक हिंसा से पहले नफरत और जहरीले भाषणों के आरोपी रहे हैं।’’

इसमें कहा गया है कि बिहार में ‘बेहद आपत्तिजनक’ घटनाएं हुई हैं जहां पुलिस की मौजूदगी में एक मस्जिद पर भगवा झंडा फहरा दिया गया। माकपा ने कहा, ‘‘मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार में प्रशासन की भूमिका अत्यधिक संदिग्ध है क्योंकि उन्होंने इस तरह के जुलूसों को पर्याप्त तैयारी के बिना अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों से गुजरने की अनुमति दी थी। इसके अलावा, मध्य प्रदेश में कानून की उचित प्रक्रिया के बिना, दंगा करने के आरोपियों की संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया गया है जिनमें से लगभग सभी अल्पसंख्यक समुदाय के हैं।’’

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