देश की खबरें | उपराष्ट्रपति नायडू ने सतत और स्थिर विकास के लिए जैविक खेती के महत्व को रेखांकित किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को सतत और स्थिर विकास के लिए जैविक खेती के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि मिट्टी और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधन असीमित नहीं हैं तथा मानव जाति का भविष्य इनके संरक्षण पर निर्भर करता है।
नयी दिल्ली, दो मई उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को सतत और स्थिर विकास के लिए जैविक खेती के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि मिट्टी और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधन असीमित नहीं हैं तथा मानव जाति का भविष्य इनके संरक्षण पर निर्भर करता है।
अक्षय कृषि परिवार द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'भूमि सुपोषण' (मृदा पोषण) के विमोचन के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए, उन्होंने कीटनाशकों और उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आने पर चिंता व्यक्त की और इस मुद्दे पर जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि भूजल के अनियंत्रित दोहन से जल स्तर तेजी से घट रहा है, जिससे मिट्टी में नमी की मात्रा कम हो रही है और उपजाऊ भूमि बंजर भूमि में तब्दील हो रही है।
उपराष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जैविक खेती के विभिन्न लाभों को सूचीबद्ध करते हुए नायडू ने कहा कि यह न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करता है, बल्कि किसानों की लागत भी कम करता है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों- जैसे गाय का गोबर और अपशिष्ट कार्बनिक पदार्थ का उपयोग कम लागत वाली जैविक खाद तैयार करने के लिए किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है।
उन्होंने मृदा संरक्षण के लिए विभिन्न सरकारी और व्यक्तिगत प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मृदा जांच के लिए प्रयोगशालाओं के नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है और गंगा नदी के तट पर बसे गांवों जैसे पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)