देश की खबरें | उपराष्ट्रपति ने दिव्यांगजन के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव का आह्वान किया
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हैदराबाद, 17 अप्रैल उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को दिव्यांगजन के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव का आह्वान किया और कहा कि यह सरकार तथा समाज की जिम्मेदारी है कि उनके खिलाफ किसी भी तरह के भेदभाव को रोका जाए।
दिव्यांगजन के आगे बढ़ने और उत्कृष्टता के लिए एक माहौल बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘उन्हें हमारी सहानुभूति की आवश्यकता नहीं है, वे अपनी पूरी क्षमता विकसित करने के लिए हर अवसर पाने के हकदार हैं।’’
राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी) के दौरे के दौरान नायडू ने बौद्धिक दिव्यांगजन और उनके परिवारों को सशक्त बनाने में संस्थान के काम की सराहना की।
दिव्यांगजन के लिए सुगमता को हस्तक्षेप का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए नायडू ने ‘सुगम्य भारत’ अभियान के सकारात्मक प्रभाव का हवाला दिया और पर्यावरण, परिवहन, सूचना और संचार प्रणालियों के क्षेत्रों में अधिक हस्तक्षेप का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को अलग-अलग बच्चों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाना आवश्यक है।
प्रौद्योगिकी से दिव्यांगजन अछूते ना रहें, यह सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने देश में राष्ट्रीय संस्थानों और विश्वविद्यालयों से सुलभ स्मार्ट प्रौद्योगिकी से संबंधित अपने काम में तेजी लाने का भी आग्रह किया।
नायडू ने ‘दिव्यांगजन’ को कम उम्र से ही उनके कौशल की पहचान और सम्मान करके उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए चौतरफा प्रयासों की पैरवी की।
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