देश की खबरें | उप राष्ट्रपति ने डिजिटल विषमता को खत्म करने की पैरवी की
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नयी दिल्ली, 30 जून उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि देश में डिजिटल विषमता (डिजिटल डिवाइड) को समाप्त करने की जरूरत है ताकि सर्वव्यापी प्राथमिक शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके और माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा को समावेशी बनाया जा सके।
उन्होंने एक पुस्तक का वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से लोकार्पण करते हुए यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी ने न सिर्फ संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं बल्कि हमें समाज में व्याप्त विशाल ‘डिजिटल डिवाइड’ के प्रति भी आगाह किया है।
प्रौद्योगिकी को सस्ता और सुलभ बनाने की जरूरत पर बल देते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि अब भी बहुत सारे बच्चों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध नहीं है। इससे जुड़ी विषमता को पाटना होगा।
नायडू ने कहा, ‘‘लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए हैं क्योंकि उन्हें ऑनलाइन शिक्षा में कठिनाई होती है। बहुत सारे लोगों को पारंपरिक शिक्षा से ऑनलाइन शिक्षा के परिवर्तन में सहायता की आवश्यकता पड़ती है। अतः उन्हें ऑनलाइन शिक्षा के लिए विधिवत प्रशिक्षण की आवश्यकता है।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘आज भी देश में अनेक अभिभावक डिजिटल उपकरणों का खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं हैं। डिजिटल डिवाइड को समाप्त करने का काम बहुत व्यापक है जिसके लिए निजी क्षेत्र को सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए।’’
उप राष्ट्रपति ने शिक्षा प्रौद्योगिकी से जुड़ी निजी क्षेत्र की कंपनियों का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों की आवश्यकता को देखते हुए सस्ते शिक्षण साधन उपलब्ध कराएं।
उन्होंने कहा, ‘‘ देश निर्माण में अपना योगदान देने का तथा अपने बच्चों के लिए उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने का, आपके लिए यह अवसर है।"
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उद्धृत करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि ‘भविष्य में ऑनलाइन ही मुख्य लाइन होगी जिससे लोगों को अन्य किसी लाइन में न लगना पड़े।’
उन्होंने एक सफल, समृद्ध भविष्य के लिए सभी से प्रधानमंत्री के तीन सूत्री मंत्र "रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रांसफॉर्म" को सिद्ध करने का आह्वाहन किया।
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