सब्जी उगाने वाले किसान आर्थिक बर्बादी के कगार पर : दीपेंद्र हुड्डा
हुड्डा ने राज्य के सब्जी किसानों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए दावा किया कि टमाटर, शिमला मिर्च और उनके द्वारा उत्पादित अन्य सब्जियां नहीं बेची जा रही हैं और हजारों क्विंटल सब्जियां सड़ रही हैं, किसान उन्हें अपने जानवरों को खिलाने के लिए मजबूर हैं।
चंडीगढ़, 18 मई कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने सोमवार को कहा कि हरियाणा में सब्जी उगाने वाले किसानों को आर्थिक बर्बादी की ओर धकेल दिया गया है और उन्हें सरकार की भावांतर भरपायी योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा है।
हुड्डा ने राज्य के सब्जी किसानों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए दावा किया कि टमाटर, शिमला मिर्च और उनके द्वारा उत्पादित अन्य सब्जियां नहीं बेची जा रही हैं और हजारों क्विंटल सब्जियां सड़ रही हैं, किसान उन्हें अपने जानवरों को खिलाने के लिए मजबूर हैं।
हुड्डा ने कहा कि तोशाम के किसानों ने इसको लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया है।
राज्यसभा सदस्य ने यहां एक बयान में कहा, ‘‘ग्राहक बाजार से 20 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से टमाटर खरीद रहे हैं, लेकिन किसान को केवल दो से पांच रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहा है। खीरा, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी, आलू, प्याज और मिर्च जैसी सब्जियां का भी यही हाल है क्योंकि ये ऊंची दर पर बिक रही हैं लेकिन किसानों को नाममात्र का पैसा मिल रहा है।’’
उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार द्वारा उसकी ‘‘भावांतर भरपायी योजना’’ में तय की गई दरें इतनी कम हैं कि किसानों की फसल उगाने में लगने वाली लागत भी पूरी नहीं निकल पा रही है।
हुड्डा ने ‘‘भावांतर योजना’’ के तहत प्याज का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार किसानों को केवल 6.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से घाटे की भरपाई कर रही है, आम लोग 30 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से प्याज खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी प्याज की बाजार कीमत 100 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक हो जाती है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के पास पहुंचने पर किसी विशेष सब्जी की दर अधिक होती है, लेकिन किसानों को बहुत कम कीमत मिलती है और उन्हें मूल्य अंतर के लिए पर्याप्त रूप से मुआवजा नहीं मिलता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि एक तरफ सरकार राज्य के कुछ हिस्सों में धान की खेती पर पाबंदी लगा रही है और किसानों को सब्जियां और अन्य फसलें उगाने के लिए कह रही है। वहीं दूसरी तरफ, जो सब्जियां उगाते हैं, उन्हें उचित कीमत नहीं मिल रही है।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 18, 2020 07:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

