मुंबई, 11 जुलाई भारतीय कंपनियों के सौदे आर्थिक चुनौतियों के कारण 2023 की पहली छमाही में बुरी तरह प्रभावित हुए।
परामर्श कंपनी ग्रांट थॉर्नटन भारत ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि जनवरी-जून, 2023 के दौरान 23 अरब डॉलर मूल्य के सिर्फ 676 सौदे हुए, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले मूल्य के हिसाब से 78 प्रतिशत जबकि मात्रा के हिसाब से 42 प्रतिशत कम है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित विलय और अधिग्रहण गतिविधियां रही। विलय-अधिग्रहण सौदे 92 प्रतिशत गिरावट के साथ सिर्फ 6.68 अरब डॉलर के हुए। पिछले साल इस दौरान यह आंकड़ा बहुत ज्यादा था, जब एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के साथ-साथ लार्सन एंड टुब्रो इन्फोटेक (एलटीआई) और माइंडट्री का विलय हुआ था।
कंपनी में भागीदार शांति विजेता ने कहा, “चालू वर्ष की पहली छमाही में भारत में सौदों में गिरावट रही, जिसका मुख्य कारण अनिश्चितताओं के कारण आपूर्ति श्रृंखला में अवरोध और उससे महंगाई और ब्याज दरों में अस्थिरता रहना है।”
विजेता हालांकि वृहद आर्थिक स्थितियों, बाजार की अस्थिरता में कमी और स्थिर ब्याद दरों के आधार पर भविष्य की तिमाहियों के लेकर ज्यादा आशावादी हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि निजी इक्विटी/उद्यम पूंजी (पीई/वीसी) क्षेत्र में 16.4 अरब डॉलर के 521 सौदे हुए, जो मात्रा के हिसाब से 40 प्रतिशत जबकि मूल्य के हिसाब से 35 प्रतिशत कम है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में तीन अरब डॉलर के सौदों और 29 बड़े सौदों ने विलय और अधिग्रहण गतिविधियों में नरमी के प्रभाव को कम करने में मदद की।
एक अरब डॉलर के और ज्यादा मूल्य के तीन अन्य सौदों के साथ फार्मा, स्वास्थ्य और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र मूल्य के मामले में सबसे आगे रहे। इन क्षेत्रों में कुल 3.45 अरब डॉलर के सौदे हुए।
इस साल जनवरी-जून में 1.4 अरब डॉलर के आरंभिक सार्वजनिक उपक्रम (आईपीओ) भी पेश किए गए, जो 2022 से मात्रा के हिसाब से 35 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 77 प्रतिशत कम है।
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