देश की खबरें | उत्तराखंड: मुख्यमंत्री के सलाहकार की कंपनी पर कांग्रेस ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

देहरादून, 23 दिसंबर उत्तराखंड विधानसभा में बुधवार को कांग्रेस सदस्यों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के एक सलाहकार की कंपनी पर 200 करोड़ रुपये से अधिक के धन-शोधन का आरोप लगाया और बाद में इस मुद्दे पर बहिर्गमन किया।

राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन मंगलौर से कांग्रेस सदस्य काजी निजामुद्दीन ने यह मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने इस साल जून में राज्य सरकार को लिखकर मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार केएस पंवार की कंपनी के 'गैरकानूनी गतिविधियों' में कथित रूप से लिप्त होने के बारे में बताया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार बनने के बाद पंवार ने 'सोशल म्यूचुअल बेनिफिट कंपनी लिमिटेड' नाम की फर्म का निदेशक पद छोड़ दिया और अब इस कंपनी का संचालन उनकी पत्नी और भाई कर रहे हैं।

कंपनी पर 200 करोड़ रुपये से अधिक के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निजामुद्दीन ने कहा कि यह मामला तात्कालिक महत्व का है और सदन की कार्यवाही रोक कर इसपर चर्चा कराई जानी चाहिए।

चकराता के विधायक और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने निजामुद्दीन का समर्थन करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार के प्रति तथाकथित ''जीरो टॉलरेंस'' की नीति उनके अपने औद्योगिक सलाहकार से ही शुरू होनी चाहिए।

सिंह ने कहा, ''फर्म द्वारा केवल तीन साल के भीतर 200 करोड़ रुपये की धनराशि का लेनदेन कैसे संभव हुआ?''

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-74 से संबधित कथित घोटाले का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के जोर देने के बावजूद उसमें सीबीआइ जांच अभी तक शुरू नहीं हो पायी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह भ्रष्टाचार का जबरदस्त मामला है जोकि मुख्यमंत्री की ''नाक के नीचे'' फल-फूल रहा है।

सिंह ने कहा, ''इससे साबित होता है कि जीरो टॉलरेंस एक नारे से अधिक कुछ नहीं है। राज्य सरकार के पास भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए सच्ची इच्छाशक्ति ही नहीं है।''

रानीखेत से कांग्रेस विधायक करण माहरा ने कहा कि ढाई लाख शेयरधारकों वाली इस कंपनी की पहचान की जांच होनी चाहिए क्योंकि कंपनी के रिकार्ड में उनके आवासीय पतों का जिक्र ही नहीं है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश ने कहा कि लोकायुक्त के गठन में विफल रही सरकार के पास भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए इच्छाशक्ति का अभाव है।

उन्होंने कहा, ''लोकायुक्त के गठन में देरी जानबूझकर की जा रही है क्योंकि मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्री इसके दायरे में आ जाएंगे।''

विपक्ष के इन आरोपों का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उन्होंने इस मामले के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक से सूचना मांगी थी और उसने साफ तौर पर कहा है कि जून 2020 में उसने उत्तराखंड सरकार को सोशल म्यूचुअल बेनिफिट कंपनी के बारे में कुछ नहीं भेजा था।

कंपनी की पहचान के बारे में कौशिक ने कहा कि विशेष जांच बल (एसटीएफ) द्वारा 2019 में की गयी जांच में इस कंपनी को 98 फर्मों में शामिल किया गया था, जिनके पास संबंधित नियामक संस्थाओं की मंजूरी है।

कौशिक के जवाब पर निजामुद्दीन ने इसे साफतौर पर मनी लांड्रिंग का मामला बताया और कहा कि वह अपने आरोपों के समर्थन में एक पेनड्राइव भी दे सकते हैं। इस पर सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोंकझोंक भी हुई।

कौशिक ने कहा कि जब उनके पास विपक्ष के आरोपों को गलत साबित करने वाले भारतीय रिजर्व बैंक और एसटीएफ के दस्तावेज हैं तो उन्हें किसी पेनड्राइव को देखने की जरूरत नहीं है ।

इस मामले में दखल देते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि जब विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया जा चुका है तो इस चर्चा को लंबा खींचने का कोई मतलब नहीं है।

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