देहरादून, 18 सितंबर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोकसभा में पारित किये गये कृषि से संबंधित विधेयकों का शुक्रवार को स्वागत करते हुए इन्हें किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया।
वहीं, इससे पहले दिन में पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता हरीश रावत इन विधेयकों के खिलाफ अनशन पर बैठ गये और इन विधेयकों को किसानों को बर्बाद करने की साजिश करार दिया।
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कांग्रेस नेता ने कहा कि ये विधेयक कॉरपोरेट जगत के हितों की पूर्ति करते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खत्म कर देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘अपने अनशन के जरिये मैं पूरे देश के किसानों के साथ अपनी एकजुटता प्रकट करना चाहता हूं।’’
उल्लेखनीय है कि कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, 2020 तथा कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 को लोकसभा में बृहस्पतिवार को पारित किया गया था।
मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘कृषि सुधार से संबंधित ऐतिहासिक विधेयकों के लोकसभा में पारित होना देश के किसानों की उन्नति का एक महत्वपूर्ण कदम है। इन विधेयकों में किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाने, उपज का उचित मूल्य दिलाने व हर तरह के बाजार तक सीधे विपणन कि सुविधा देने के प्रावधान हैं। ’’
इन विधेयकों को लाने के लिये उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का किसान समुदाय की ओर से आभार प्रकट किया।
वहीं, गांधी पार्क में सुबह पौने 10 बजे अनशन पर बैठने से पहले हरीश रावत ने महात्मा गांधी की प्रतिमा को पुष्प अर्पित किया। वह दोपहर पौने 12 बजे तक अनशन पर बैठे।
अपना अनशन समाप्त करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव एवं पार्टी के पंजाब मामलों के प्रभारी ने कहा कि पूरे देश में किसान तीन विधेयकों के खिलाफ सड़कों पर उतर आये हैं।
उन्होंने इन विधेयकों को ‘‘काला कानून’’ करार देते हुए कहा कि यह किसानों को बर्बाद करने की साजिश है।
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