देश की खबरें | उत्तराखंड: 'कुली बेगार' के खिलाफ आंदोलन के 100 साल पूरे
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

पिथौरागढ, 13 जनवरी ब्रिटिश काल में जबरन मजदूरी एवं शोषण प्रथा 'कुली बेगार' के खिलाफ कुमांउ क्षेत्र में किसानों द्वारा चलाए गए आंदोलन के 100 वर्ष पूरे होने पर बागेश्वर जिले में सरयू नदी के किनारे तक एक प्रतीकात्मक सत्याग्रह रैली निकाली गई ।

सत्याग्रह रैली के आयोजक रंजीत सिंह बोरा ने कहा, ‘‘ कुमांउ नेता बद्री दत्त पांडे की अगुवाई में चला यह आंदोलन दौरे पर आने वाले ब्रिटिश अधिकारियों के लिए बेगार किए जाने के खिलाफ था । इस आंदोलन में कुमांउ भर के 40,000 लोगों ने हिस्सा लिया था ।'’

उन्होंने बताया कि यह आंदोलन 1921 में 14 जनवरी को उत्तरायण या मकर संक्रांति के दिन शुरू किया गया था जिसमें ग्रामीणों ने इस प्रथा के विरोध में 'कुली बेगार' के रजिस्टर सरयू नदी में बहा दिए थे । इस प्रथा में दौरे पर आने वाले ब्रिटिश अधिकारियों का सामान लोगों को बिना किसी भुगतान के एक स्थान से दूसरे स्थान तक ढोने को मजबूर किया जाता था ।

बोरा ने बताया कि ग्रामीणों को ‘टॉयलेट पिट्स’ भी ढोने पड़ते थे ।

इस प्रथा को खत्म कराने वाले आंदोलन के 100 साल पूरे होने पर वरिष्ठ नागरिक कल्याण ट्रस्ट द्वारा बागेश्वर शहर के मुख्य चौराहे से लेकर सरयू नदी के किनारे तक रैली निकाली गई ।

इस आंदोलन के अगुआ बद्री दत्त पांडे को बाद में 'कुमांउ केसरी' के खिताब से नवाजा गया । बुधवार की रैली का मुख्य आकर्षण पांडे के पोत कर्नल रिटायर्ड रविंद्र पांडे रहे जिन्होंने इसमें हिस्सा लिया ।

उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी ने बताया कि कुमांउ क्षेत्र में अपनी तरह के इस पहले आंदोलन को महात्मा गांधी के आशीर्वाद से शुरू किया गया था । इस आंदोलन के बाद गांधी वर्ष 1929 में कुमांउ के दौरे पर आए थे ।

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