देश की खबरें | उत्तर प्रदेश: बदायूं मंदिर-मस्जिद विवाद पर सुनवाई टली

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की एक अदालत में जारी नीलकंठ महादेव मंदिर बनाम शम्सी जामा मस्जिद के मुकदमे की सुनवाई बृहस्पतिवार को 30 अगस्त के लिए स्थगित कर दी गयी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

बदायूं, 24 जुलाई उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की एक अदालत में जारी नीलकंठ महादेव मंदिर बनाम शम्सी जामा मस्जिद के मुकदमे की सुनवाई बृहस्पतिवार को 30 अगस्त के लिए स्थगित कर दी गयी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) सुमन तिवारी के मातृत्व अवकाश पर जाने की वजह से सुनवाई स्थगित कर दी गई।

मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि मुकदमा अपर दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन)/‘फास्ट ट्रैक’ अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है।

‘फास्ट ट्रैक’ अदालत के न्यायाधीश पुष्पेंद्र चौधरी ने बताया कि इस मामले की अगली सुनवाई 30 अगस्त को तय की गयी है।

अदालत ने मुकदमे की पिछली सुनवाई में ‘शम्सी जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी’ के अधिवक्ता अनवर आलम का पक्ष सुना था।

आलम ने अदालत में दलील दी थी कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक, अधीनस्थ न्यायालय इस तरह के धार्मिक ढांचे के विवाद पर सुनवाई के लिए अधिकृत नहीं हैं और इस मुकदमे को एक सिरे से खारिज किया जाना चाहिए।

नीलकंठ महादेव मंदिर पक्ष के अधिवक्ता वेद प्रकाश साहू ने बताया कि 24 जुलाई को इस बात पर फैसला होना था कि इस तरह के मामले अधीनस्थ न्यायालय में सुने जा सकते हैं या नहीं।

मुकदमे की सुनवाई वकीलों के अनुपस्थित रहने, अदालत में अवकाश रहने और न्यायाधीश के तबादले की वजह से फरवरी से टलती आ रही है।

न्यायाधीश ने 28 मई को मुकदमे की फाइल की समीक्षा की और दोनों पक्षों को पांच जुलाई को अपनी दलीलें पेश करने का निर्देश दिया।

वकील आलम ने पांच जुलाई को दोहराया कि उपासना स्थल अधिनियम, 1991 और शीर्ष अदालत के संबंधित फैसलों के तहत, अधीनस्थ न्यायालय के पास ऐसे मामलों की सुनवाई करने का अधिकार नहीं है।

मंदिर के वकील विवेक कुमार रेंडर ने दलील दी कि उच्चतम न्यायालय के आदेश जारी या पहले से दायर मुकदमों की सुनवाई पर रोक नहीं लगाते।

उन्होंने कहा कि मामले की पूरी सुनवाई होनी चाहिए।

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