नयी दिल्ली, 10 जून विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि सरकार ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े विषयों के नाम पर भारत यात्रा करना चाह रही यूएससीआईआरएफ की टीमो को वीजा नहीं दिया क्योंकि उसके जैसी विदेशी संस्था को भारतीय नागरिकों के संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकारों पर बोलने का कोई हक नहीं है।
जयशंकर ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को लिखे एक पत्र में यह जानकारी दी जिन्होंने अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ प्रतिबंधों की मांग उठाने के मुद्दे को उठाया था।
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विदेश मंत्री ने कहा कि यूएससीआईआरएफ भारत में धार्मिक आजादी की स्थिति के संबंध में पूर्वागह युक्त, गलत और भ्रामक टिप्पणियां करने के लिए जाना जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस तरह की बातों का संज्ञान नहीं लेते और भारत के संबंध में गलत तरह से सूचनाएं पेश करने की कोशिशों का खंडन कर चुके हैं।’’
जयशंकर ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने आयोग के बयानों को गलत और अनुचित बताकर खारिज कर दिया है।
उन्होंने लिखा, ‘‘हमने यूएससीआईआरएफ की टीमों को वीजा देने से भी मना कर दिया है जो धार्मिक आजादी से जुड़े मुद्दों के सिलसिले में भारत आना चाहती थीं। हमें यूएससीआईआरएफ जैसी विदेशी संस्था का भारतीय नागरिकों के संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकारों पर बोलने का कोई अधिकार-क्षेत्र नहीं नजर आता।’’
जयशंकर ने भाजपा सांसद को यह आश्वासन भी दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और अपने नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर किसी तरह का बाहरी हस्तक्षेप या बयानबाजी स्वीकार नहीं करेगा।
यूएससीआईआरएफ ने पिछले साल कहा था कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 गलत दिशा में एक खतरनाक मोड़ साबित होगा। उसने भारतीय संसद के दोनों सदनों में विधेयक पारित होने पर शाह के खिलाफ अमेरिकी पाबंदियों की मांग की थी।
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