नयी दिल्ली, 20 जनवरी केंद्र सरकार ने तीन मूर्ति एस्टेट परिसर को खाली करने के लिए जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड (जेएनएमएफ) को दिए गए बेदखली नोटिस से संबंधित मामले की तत्काल सुनवाई के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय से शुक्रवार को अनुरोध किया।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने जेएनएमएफ के वकील द्वारा सुनवाई स्थगित करने के अनुरोध का जोरदार विरोध किया। जेएनएमएफ ने 2018 में जारी बेदखली नोटिस को यह कहते हुए चुनौती दी है कि यह अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।
एएसजी शर्मा ने कहा कि विचाराधीन स्थल पर एक संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव है जो "राष्ट्रीय महत्व की परियोजना" है, और याचिकाकर्ता को केंद्र की भूमि पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
इस परिसर में अब 'प्रधानमंत्री संग्रहालय' है, जो स्वतंत्रता के बाद के सभी प्रधानमंत्रियों को श्रद्धांजलि के रूप में बनाया गया एक संग्रहालय है।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए मामले की सुनवाई के लिए 24 जनवरी की तारीख मुकर्रर की।
न्यायाधीश ने कहा, "मामले को 24 जनवरी को दोपहर सवा दो बजे (सुनवाई के लिए) सूचीबद्ध करें।"
अदालत को अवगत कराया गया कि इस मामले की सुनवाई पहले एक अन्य पीठ द्वारा की गई थी और अब इस पर नये सिरे से विचार किया जाना है।
शर्मा ने अपनी दलील में कहा, “वर्ष 2018 में एक ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया था। यह सार्वजनिक परिसर है। आप उच्च न्यायालय का दरवाजा कैसे खटखटा सकते हैं? यह एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना है।’’
जेएनएमएफ ने 2018 में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और संपदा अधिकारी के 15 अक्टूबर, 2018 के बेदखली नोटिस को रद्द करने की मांग की थी।
जेएनएमएफ तीन मूर्ति भवन में 1967 से स्थित है, जो एक समय भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का निवास स्थान था। जेएनएमएफ की स्थापना 1964 में हुई थी।
जेएनएमएफ ने इस दावे का खंडन किया है कि संपत्ति पर उसका अवैध कब्जा है।
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