देश की खबरें | अल्पसंख्यकों के लिए बजट आवंटन की सदन के बाहर घोषणा करने को लेकर कर्नाटक विधानसभा में हंगामा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को हंगामा हुआ, क्योंकि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर आरोप लगाया कि उन्होंने सत्र जारी रहने के दौरान हाल में मुस्लिम समुदाय के एक कार्यक्रम में अल्पसंख्यकों के लिए 10,000 करोड़ रुपये की घोषणा कर सदन की शुचिता को भंग किया।

बेलगावी (कर्नाटक), छह दिसंबर कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को हंगामा हुआ, क्योंकि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर आरोप लगाया कि उन्होंने सत्र जारी रहने के दौरान हाल में मुस्लिम समुदाय के एक कार्यक्रम में अल्पसंख्यकों के लिए 10,000 करोड़ रुपये की घोषणा कर सदन की शुचिता को भंग किया।

भाजपा ने आरोप लगाया कि जो सरकार सूखा प्रभावित किसानों को राहत देने में असमर्थ है, वह विधानसभा के संज्ञान में लाए बिना अल्पसंख्यकों के लिए 10,000 करोड़ रुपये की घोषणा कर रही है। भाजपा ने मांग की कि मुख्यमंत्री अपना बयान वापस लें और सदन से माफी मांगें।

हालांकि, सत्तापक्ष के सदस्यों ने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि सिद्धरमैया ने केवल यह कहा है कि वह हर साल अल्पसंख्यक विभाग के लिए बजट बढ़ाने का इरादा रखते हैं और अंततः विभाग के माध्यम से 10,000 करोड़ रुपये खर्च करने का इरादा है। कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि भाजपा इस पर आपत्ति जता रही है क्योंकि वह अल्पसंख्यकों को धन देने की विरोधी है।

गत चार दिसंबर को हुबली में औलाद-ए-गौस-ए-आजम सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिद्धरमैया ने कहा था, ‘‘मैं कहना चाहता हूं कि इस साल हमने अल्पसंख्यक विभाग को (वार्षिक बजट में) 4,000 करोड़ रुपये दिए हैं, और हम इसे हर साल बढ़ाने का काम करेंगे। आखिरकार, हमारा इरादा अल्पसंख्यक विभाग के जरिए 10,000 करोड़ रुपये खर्च करने का है।’’

भाजपा विधायक सुनील कुमार ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, ‘‘यह परंपरा है कि जब विधानसभा का सत्र चल रहा हो तो बाहर किसी भी सरकारी कार्यक्रम की घोषणा नहीं की जाती है, लेकिन हुबली में एक मुस्लिम समुदाय के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 10,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की। जब सदन का सत्र चल रहा हो, तो सदन के सदस्य के रूप में हमें इसकी वजह जानने का अधिकार है।’’

उन्होंने मुख्यमंत्री पर सदन की शुचिता भंग करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें माफी मांगनी चाहिए।

मंत्री प्रियंक खरगे सहित सत्तारूढ़ कांग्रेस के कई सदस्यों ने मुख्यमंत्री का बचाव करने की कोशिश की और कहा कि उन्होंने जो कहा उसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि अंततः मामला सदन में आना है और खर्च किए गए प्रत्येक रुपये को विधानसभा द्वारा मंजूर किया जाना है।

इसके बाद, सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बहस शुरू हो गई, इसके बावजूद विधानसभाध्यक्ष यू टी खादर ने यह कहते हुए इसे रोकने की कोशिश की, ‘‘मुख्यमंत्री को सदन में आने दीजिए और उन्हें स्पष्टीकरण देने दीजिए। तब तक, आगे की कार्यवाही जारी रखते हैं।’’

कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच के पाटिल ने इसमें हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इस मुद्दे को उठाने वाले विधायक सुनील कुमार को "जानकारी नहीं है या उनके पास जानकारी का अभाव है और मुख्यमंत्री की ओर से सदन के विशेषाधिकार का हनन या परंपरा का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।’’

उन्होंने कहा कि वह उस कार्यक्रम का हिस्सा थे जिसे सिद्धरमैया ने संबोधित किया था। उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यकों को बजट आवंटन का उल्लेख करते हुए कहा था कि वह इसे अगले बजट में और बढ़ाएंगे और 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे... अगर मुख्यमंत्री ने कहा होता कि उन्होंने इस साल 10,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं या आवंटित करेंगे, तो आपकी दलील में कुछ दम होता।’’

हालांकि, सुनील कुमार और भाजपा के अन्य सदस्यों ने अपने तर्क के समर्थन में मीडिया की खबरों का हवाला दिया, जिस पर मंत्री दिनेश गुंडू राव सहित सत्तारूढ़ कांग्रेस के सदस्यों ने आपत्ति जताई, जिससे सदन में शोरगुल हुआ।

राव और कुछ कांग्रेस सदस्यों ने यहां तक आरोप लगाया कि भाजपा की "दिक्कत सदन की किसी परंपरा को लेकर नहीं, बल्कि मुसलमानों जैसे अल्पसंख्यकों पर खर्च बढ़ाने की सरकार की योजना को लेकर है।’’

कांग्रेस विधायक बसवराज रायरेड्डी ने नियम पुस्तिका का हवाला देते हुए व्यवस्था का प्रश्न उठाया और कहा कि इस मुद्दे को सदन में उठाने का कोई आधार नहीं है और यह विशेषाधिकार का हनन भी नहीं है।

इसपर हस्तक्षेप करते हुए, विपक्ष के नेता आर अशोक (भाजपा) ने कहा, "हमने भी मंत्री के रूप में काम किया है और सत्र के दौरान (सदन के बाहर) कभी भी किसी सरकारी कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है, इसलिए मुझे भी संदेह था कि मुख्यमंत्री, जिनके पास कई बार बजट पेश करने का अनुभव है, ने क्या ऐसा बयान दिया है। लेकिन मैंने खुद यह एक समाचार चैनल पर देखा - मुख्यमंत्री कह रहे थे कि वह इस बजट में 10,000 करोड़ रुपये देंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यदि सत्र जारी रहने के दौरान मुख्यमंत्री सदन के बाहर घोषणा करते हैं, तो सत्र की आवश्यकता क्या है? आपके द्वारा बाहर घोषणा करना इसे राजनीतिक बनाता है।’’

इसके बाद, सत्तारूढ़ और विपक्ष के बीच बहस शुरू हो गई और अशोक ने उनके हस्तक्षेप को बाधित करने की कोशिश करने वाले कांग्रेस सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा, "मैं विपक्ष के नेता के रूप में बोल रहा हूं। यदि आप इस तरह से बाधा डालेंगे, तो हमारे पास भी संख्याबल है। जब आपके नेता, मुख्यमंत्री बोलेंगे, तो हमारे पास भी संख्याबल होती है। हम 85 सदस्य हैं।’’ कांग्रेस के कई विधायकों ने अशोक के बयान पर कड़ी आपत्ति जतायी, जिससे शोरगुल और बढ़ गया।

अशोक ने कहा कि सूखे से राहत के लिए सरकार लगभग 2,000 करोड़ रुपये जारी नहीं कर पा रही है, लेकिन वे अल्पसंख्यकों के लिए 10,000 करोड़ रुपये की घोषणा करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से बयान वापस लेने का आग्रह किया।

स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने जैसे ही मुख्यमंत्री के बयान का बचाव करने की कोशिश की, भाजपा सदस्यों ने आपत्ति जतायी और खुद मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग की, जिससे तीखी नोकझोंक हुई।

इसके बाद भाजपा सदस्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।

एच के पाटिल और कांग्रेस के अन्य विधायकों और मंत्रियों ने भाजपा पर विधानसभा को "झूठ की फैक्टरी" में तब्दील करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और अशोक के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री के बोलने पर उन्हें बाधित करने के लिए संख्याबल होने का दावा किया था। उन्होंने मांग की कि विपक्ष के नेता अपना बयान वापस ले लें और माफी मांगें।

पाटिल ने भाजपा के कृत्य को लोकतंत्र के लिए हानिकारक बताया।

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