देश की खबरें | उपहार सिनेमा अग्निकांड : अदालत ने सबूतों से छेड़छाड़ मामले में अंसल बंधुओं को रिहा करने का आदेश दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को रियल एस्टेट कारोबारी सुशील और गोपाल अंसल को उपहार सिनेमा हॉल में आग लगने की घटना के संबंध में सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में जेल में बिताई गई अवधि के आधार पर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। वर्ष 1997 में उपहार सिनेमा हॉल में आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी।

नयी दिल्ली, 19 जुलाई दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को रियल एस्टेट कारोबारी सुशील और गोपाल अंसल को उपहार सिनेमा हॉल में आग लगने की घटना के संबंध में सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में जेल में बिताई गई अवधि के आधार पर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। वर्ष 1997 में उपहार सिनेमा हॉल में आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी।

जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने मंगलवार को अदालत के पूर्व कर्मचारी दिनेश चंद शर्मा और दोषी करार एक अन्य अभियुक्त पी पी बत्रा को भी जेल में काटी गई सजा के मद्देनजर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, जिला न्यायाधीश ने पूर्व में मजिस्ट्रेटी अदालत द्वारा सुशील और गोपाल अंसल दोनों पर लगाए गए 2.25 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम आपके साथ सहानुभूति रखते हैं (उपहार त्रासदी के पीड़ितों के संगठन की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति)। कई लोगों की जान चली गई, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। लेकिन, आपको यह समझना चाहिए कि दंड नीति प्रतिशोध के बारे में नहीं है। हमें उनकी (अंसल बंधुओं) उम्र पर विचार करना होगा। आपने नुकसान झेला है, लेकिन उन्होंने भी नुकसान सहा है।’’

आदेश सुनाए जाने के बाद, कृष्णमूर्ति ने न्यायाधीश से कहा कि यह आदेश ‘नाइंसाफी’ है और उनका न्यायपालिका से विश्वास उठ गया है। कृष्णमूर्ति ने न्यायाधीश से कहा, ‘‘यह पूरा अन्याय है। अगर आरोपी अमीर और ताकतवर है तो हमें न्यायपालिका पर भरोसा नहीं हो सकता...मैंने अदालत में आकर गलती कर दी। सिस्टम भ्रष्ट है।’’ यह कहने के बाद कृष्णमूर्ति अदालत कक्ष से बाहर निकल गईं।

अदालत ने सोमवार को असंल बंधुओं और दो अन्य लोगों द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया, जिसमें मजिस्ट्रेटी अदालत द्वारा उनकी दोषसिद्धि को चुनौती दी गई थी।

मामला मुख्य अग्नि त्रासदी मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ से संबंधित है जिसमें अंसल बंधुओं को दोषी ठहराया गया था और उच्चतम न्यायालय ने दो साल की जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि, जेल में काटी गई अवधि पर विचार करते हुए शीर्ष अदालत ने उन्हें इस शर्त पर रिहा कर दिया कि वे राष्ट्रीय राजधानी में एक ट्रॉमा सेंटर के निर्माण में इस्तेमाल के लिए 30-30 करोड़ रुपये का जुर्माना देंगे।

आरोपपत्र के अनुसार, छेड़छाड़ किए गए दस्तावेजों में घटना के तुरंत बाद बरामदगी का विवरण देने वाला पुलिस मेमो, उपहार सिनेमा हॉल के अंदर स्थापित ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत से संबंधित दिल्ली अग्निशमन सेवा के रिकॉर्ड, प्रबंध निदेशक की बैठकों के ब्यौरे और चार चेक शामिल हैं। दस्तावेजों के ब्यौरे से साबित हुआ कि अंसल बंधु सिनेमा हॉल के दिन-प्रतिदिन के मामलों को देख रहे थे। आरोपपत्र में कहा गया कि मुख्य मामले में अंसल बंधुओं ने बचाव में कहा था कि दिन-प्रतिदिन के कामकाज में उनकी कोई भागीदारी नहीं थी।

पहली बार 20 जुलाई 2002 को सबूतों से छेड़छाड़ का पता चला और दिनेश चंद शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। उसे निलंबित कर दिया गया और 25 जून, 2004 से उसकी सेवा समाप्त खत्म कर दी गई। उपहार सिनेमा में 13 जून, 1997 को फिल्म ‘बॉर्डर’ के प्रदर्शन के दौरान आग लग गई थी, जिसमें 59 लोगों की जान चली गई थी।

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