देश की खबरें | उप्र : भाजपा में प्रदेश परिषद के सदस्यों की घोषणा होने के बाद ही होगा अध्यक्ष पद का चुनाव

लखनऊ, 23 मार्च भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई के नए अध्यक्ष का चुनाव मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में होने की संभावना है। पार्टी नेताओं ने यह जानकारी दी।

हालांकि ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चुनाव मार्च के अंत तक हो सकते हैं, लेकिन पार्टी नेताओं ने कहा कि इसे अप्रैल तक भी टाला जा सकता है, क्योंकि भाजपा की राज्य परिषद के सदस्यों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है।

जातीय समीकरण से प्रभावित उत्तर प्रदेश में लोगों की निगाहें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर ही नहीं, बल्कि उनकी जाति पर भी है।

राज्य के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के जोर के कारण, भाजपा कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों के एक वर्ग को लगता है कि पार्टी अपने अध्यक्ष के चयन में पिछड़े वर्गों को प्राथमिकता दे सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति में भाजपा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की एक प्रमुख जाति को आगे बढ़ाने पर विचार कर सकती है।

भाजपा के एक पुराने कार्यकर्ता ने बताया कि, "इस पद के लिए पार्टी द्वारा लोध जाति के किसी नेता को तरजीह दिए जाने की प्रबल संभावना है।"

भाजपा के वरिष्ठ नेता दिवंगत कल्याण सिंह, लोध समुदाय से आने वाले सबसे बड़े ओबीसी नेता थे और उनके निधन के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी उसी ओबीसी उपजाति के किसी नेता को इस पद के लिए चुन सकती है।

भाजपा के एक कार्यकर्ता ने कहा, ''लोध समुदाय से आने वाले दो प्रमुख नाम चर्चा में हैं, जिनमें प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह अथवा केन्‍द्रीय राज्‍य मंत्री बीएल वर्मा को भी मौका मिल सकता है।''

हालांकि, भाजपा के नेताओं की यह भी दलील है कि पार्टी नेतृत्व के फैसले अप्रत्याशित होते हैं, इसलिए किसी एक नाम पर दावा नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पार्टी में बहुत से लोग निश्चित रूप से नहीं कह सकते कि अध्यक्ष पद के लिए पार्टी का कौन सा चेहरा होगा। पार्टी के एक पुराने कार्यकर्ता ने स्वीकार किया, "हालांकि यह कहा जा सकता है कि चेहरा तय करने में जाति निश्चित रूप से एक प्रमुख विषय होगी।"

उत्तर प्रदेश में 70 जिला अध्यक्षों के चुनाव में जाति का पहलू स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इनमें से 39 जिलाध्यक्ष अगड़ी जातियों से बनाये गये हैं, जिनमें 20 ब्राह्मण चेहरे शामिल हैं।

इस आधार पर यह चर्चा है कि पार्टी किसी ब्राह्मण को भी मौका दे सकती है।

भाजपा के एक नेता ने कहा, " दावा तो नहीं कर सकते, लेकिन अगर इस पद के लिए किसी ब्राह्मण को चुना जाता है, तो भाजपा के प्रदेश महासचिव और विधान परिषद सदस्य गोविंद नारायण शुक्ला और बस्ती से पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के चुने जाने की संभावना अधिक है।"

हालांकि, इस नेता ने यह भी कहा कि कई अन्य ब्राह्मण दावेदार भी कतार में हैं।

पार्टी नेतृत्व अगर किसी दलित को प्रदेश इकाई की कमान सौंपती है, तो प्रदेश महासचिव समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर मजबूत दावेदार हैं।

दलित नेताओं में और भी चेहरे तलाशे जा सकते हैं।

भाजपा की उप्र इकाई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने 'पीटीआई-' को बताया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए कम से कम 50 फीसदी संगठनात्मक जिलों में जिला अध्यक्षों का चुनाव और प्रदेश परिषद के सदस्यों की घोषणा जरूरी है, जिसके बाद ही यह प्रक्रिया पूरी होगी।

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