देश की खबरें | उप्र : अब मंडी से बाहर व्यापार करने पर फूल किसानों को नहीं देना होगा कोई शुल्क

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तर प्रदेश सरकार ने फूल किसानों को मंडी परिसर से बाहर व्यापार करने पर मंडी शुल्क से पूरी तरह मुक्त करने का फैसला किया है। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई।

लखनऊ, पांच जुलाई उत्तर प्रदेश सरकार ने फूल किसानों को मंडी परिसर से बाहर व्यापार करने पर मंडी शुल्क से पूरी तरह मुक्त करने का फैसला किया है। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई।

बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शनिवार को सम्पन्न उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के संचालक मंडल की 171वीं बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस निर्णय के बाद अब फूल की खेती करने वाले किसानों को मंडी परिसर से बाहर व्यापार करने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा, जबकि मंडी परिसर में उनसे मात्र प्रयोक्ता शुल्क लिया जाएगा।

बयान में कहा गया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने फूल की खेती से जुड़े किसानों को बड़ी राहत देते हुए 'सभी प्रकार के फूलों' को विनिर्दिष्ट कृषि उत्पाद (उन कृषि उत्पादों को जिन्हें सरकार द्वारा मंडी या विशेष क्षेत्र में व्यापार करने के लिए चिन्हित किया गया है) की श्रेणी से हटाकर गैर-विनिर्दिष्ट श्रेणी में रखने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि फूलों की ताजगी अल्पकालिक होती है और यह नाशवान प्रकृति का उत्पाद है। मंडी तक लाने में समय लगने से फूलों की गुणवत्ता पर असर पड़ता है और किसान उचित मूल्य से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में किसानों से फूलों की बिक्री मंडी के बाहर करने पर किसी भी प्रकार का मंडी शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। यह निर्णय विशेष रूप से छोटे, सीमांत और फूलों की मौसमी खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ा संबल सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडियों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जहां किसान सुविधाजनक, सुरक्षित और सम्मानजनक ढंग से अपनी उपज का विक्रय कर सके। योगी ने मंडी परिषद की सभी प्रधान कृषि मंडी स्थलों में ‘शबरी कैंटीन’ स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन कैंटीनों का उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सेवा भावना के साथ सस्ता, स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट भोजन सुनिश्चित करना होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रदेश में आवश्यकता के अनुसार नयी मंडियों की स्थापना की जाए और इसके लिए पीपीपी मॉडल पर संभावनाएं तलाश कर योजनाएं बनाई जाएं।

इस बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में मंडी परिषद की कुल आय 1994.55 करोड़ रुपये रही है, जो कि 2023-24 की तुलना में 16.2 प्रतिशत अधिक है। यह परिषद की आर्थिक स्थिति में सुधार का स्पष्ट संकेत है।

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