संयुक्त राष्ट्र / जिनेवा, चार सितंबर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने सोमवार को कहा कि मणिपुर में महिलाओं एवं लड़कियों को निशाना बनाकर हुई लिंग आधारित हिंसा की खबरों और तस्वीरों से वे "स्तब्ध" हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत सरकार से हिंसा की घटनाओं की जांच करने और अपराधियों को जिम्मेदार ठहराने के लिए समय से कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने मणिपुर में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की खबरों को लेकर चिंता जताई, जिनमें यौन हिंसा, न्यायेतर हत्याएं, जबरन विस्थापन, यातना और दुर्व्यवहार के कथित कृत्य शामिल हैं।
भारत ने अतीत में कहा था कि न्यायपालिका सहित सभी स्तरों पर अधिकारी मणिपुर की स्थिति से अवगत हैं और शांति एवं सद्भाव तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वे कदम उठा रहे हैं।
विशेषज्ञों ने एक बयान में कहा, ‘‘हम सभी उम्र की सैकड़ों महिलाओं और लड़कियों एवं मुख्य रूप से कुकी जातीय अल्पसंख्यक को निशाना बनाने वाली लिंग आधारित हिंसा की खबरों एवं तस्वीरों से स्तब्ध हैं...।’’
उन्होंने कहा, "जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और दमन को वैध बनाने के लिए आतंकवाद-रोधी कदमों के कथित दुरुपयोग से हम और चिंतित हैं।"
विशेषज्ञों ने भारत सरकार से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए प्रयासों में तेजी लाने और हिंसा की जांच करने के लिए समय पर कार्रवाई करने एवं अधिकारियों सहित अपराधियों को जिम्मेदार ठहराने का आग्रह किया।
विशेषज्ञों ने दावा किया कि मणिपुर की हाल की घटनाएं भारत में धार्मिक एवं जातीय अल्पसंख्यकों की लगातार बिगड़ती स्थिति की दिशा में एक और दुखद मील का पत्थर है।
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