तूतीकोरिन (तमिलनाडु), चार सितंबर सनातन धर्म विरोधी रुख को लेकर व्यापक स्तर पर विरोध होने के बावजूद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता और तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार को कहा कि उन्होंने आस्था में कुछ प्रथाओं के ‘‘उन्मूलन’’ की बात की थी और वह उनके खिलाफ आवाज उठाना जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ हिंदू आस्था के बारे में नहीं, बल्कि उन सभी (आस्थओं) के बारे में बात की जिनमें ऐसा किया जाता है।
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं उस मुद्दे पर बार-बार बात करूंगा जिस पर मैंने शनिवार को कार्यक्रम में बात की थी। मैं और भी बोलूंगा। मैंने उस दिन ही कहा था कि मैं उस मुद्दे पर बात करने जा रहा हूं जो कई लोगों को क्रोधित कर देगा और वही हुआ।’’
उन्होंने दावा किया कि सनातन धर्म का मतलब है कि यह स्थायी है और इसे बदला नहीं जा सकता।
उदयनिधि ने कहा, ‘‘महिलाएं घर के अंदर ही सीमित थीं लेकिन वे बाहर निकल आई हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा नहीं मिल सकती, केवल द्रविड़म (द्रमुक की विचारधारा) ने उन्हें शिक्षा दी। यहां तक कि (तमिलनाडु में) नाश्ता योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक बच्चे, विशेषकर लड़कियां शिक्षा प्राप्त कर सकें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सनातन ने महिलाओं को गुलाम बनाया।’’
उन्होंने कहा कि एक समय सती प्रथा हुआ करती थी जिसमें विधवाएं अपने पतियों की चिता में कूदकर अपनी जान दे देती थीं।
उन्होंने कहा, "ये सभी सनातन धर्म से संबंधित हैं। मैंने इसी को खत्म करने पर जोर दिया है। मैं ऐसा कहना जारी रखूंगा।’’
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को लेकर उन्हें जान से मारने की मिल रही धमकियों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
तमिलनाडु के युवा कल्याण मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार को यह टिप्पणी कर विवाद पैदा कर दिया कि ‘सनातन धर्म’ समानता एवं सामाजिक न्याय के विरुद्ध है और इसका उन्मूलन करने की जरूरत है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने ‘सनातन धर्म’ की तुलना कोरोना वायरस, मलेरिया और डेंगू से करते हुए कहा था कि ऐसी चीजों का विरोध नहीं करना चाहिए बल्कि इनका उन्मूलन कर देना चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद ने उदयनिधि की टिप्पणी की निंदा करते हुए हिंदुओं से अपील की कि वे देश में एकता और धार्मिक सद्भाव के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने का प्रयास करने वाले ‘‘छद्म द्रविड़ों’’ को उचित जवाब दें।
विहिप के अखिल भारतीय संयुक्त सचिव पी.एम. नागराजन ने उदयनिधि से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या उनके विचार राज्य सरकार के विचारों को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर ऐसा है तो हम केंद्र सरकार को बताएंगे कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का अनुसरण करने का अधिकार देते हैं।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY