यूएई ने कोविड-19 का जीनोम अनुक्रमण तैयार करने की घोषणा की
कोरोना वायरस का मुकाबला करने के लिये देश के प्रयासों को बढ़ाने के वास्ते गठित ‘‘ कोविड-19 कमान एवं नियंत्रण केंद्र (सीसीसी) के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि इस वायरस के 30 हजार आनुवांशिकी आधार (जीन) है।
दुबई, 15 अप्रैल संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने बुधवार को कोविड-19 का पूर्ण जीनोम अनुक्रमण तैयार करने की घोषणा की। यह इस प्राणघातक कोरोना वायरस के उद्गम का पता लगाने का अहम हथियार है।
कोरोना वायरस का मुकाबला करने के लिये देश के प्रयासों को बढ़ाने के वास्ते गठित ‘‘ कोविड-19 कमान एवं नियंत्रण केंद्र (सीसीसी) के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि इस वायरस के 30 हजार आनुवांशिकी आधार (जीन) है।
उल्लेखनीय है कि कई अन्य देश भी मरीजों के नमूने वायरस का जीनोम अनुक्रमण तैयार कर रहे हैं।
सीसीसी ने कहा, ‘‘वायरस के फैलाव और लगातार हो रहे प्रजनन से आनुवंशिक सामग्री में छोटे बदलाव होते हैं।’’
दुबई में मरीज के शरीर से लिए गए वायरस का जीनोम अनुक्रमण मोहम्मद बिन राशिद यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसीन एंड हेल्थ साइंसेज (एमबीआरयू) के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है।
एमबीआरयू के कुलपति और कोविड-19 सीसीसी के प्रमुख अमेर शरीफ ने कहा, ‘‘ वायरस के प्रसार को रोकने के लिए रणनीति बनाने में वैज्ञानिक शोध महत्वपूर्ण संसाधन हैं। हम सौभाग्यशाली है कि हमारे पास शैक्षणिक संस्थान हैं जो दुबई के अन्य क्षेत्रों के साथ कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हुए हैं।’’
हालिया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि कोरोना वायरस के आनुवंशिकी में औसतन हर दूसरे हफ्ते बदलाव आ रहा है। ऐसे में वायरस का आनुवांशिकी अनुक्रमण (जेनेटिक सीक्वेंस) और विभिन्न मरीजों में समय के साथ आने वाले इसकी आनुवंशिकी में बदलाव के अध्ययन से वैज्ञानिकों को इसके प्रसार के बारे में समझने और महामारी को रोकने में मदद मिलेगी।
एमबीआरयू के अध्यक्ष और अमीरात वैज्ञानिक परिषद के सदस्य अलावई अल शेख अली ने कहा, ‘‘यह उपलब्धि विज्ञान और वैज्ञानिक समुदाय की बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित करने में भूमिका को रेखांकित करता है। यह दुबई स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोगियों एवं अल जलीला चिल्ड्रेन्स जीनोम सेंटर के सहयोग से हो रहे वृहद अध्ययन का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव है।’’
अलावई ने कहा, ‘‘ हमारा उद्देश्य विभिन्न आयुवर्ग और महामारी के विभिन्न चरणों में संक्रमित 240 मरीजों से प्राप्त वायरस के नमूनों का आनुवांशिकी अनुक्रमण करना है। हम अपने मरीजों से बीमारी की गंभीरता संबंधी जानकारी एकत्र करेंगे जिससे वायरस में हुए बदलाव जो बीमारी की गंभीरता से जुड़े हैं समझने में मदद मिलेगी।’’
उन्होंने बताया कि इसके नतीजों से वायरस के उद्भव का पता चलेगा।
एमबीआरयू में अनुवांशिकी के एसोसिएट प्रोफेसर अहमद अबू तयून ने कहा, ‘‘यह विशेष उदाहरण है कि कैसे यह सूचना हमें यूएई के किसी मरीज में संक्रमण के उद्भव के बारे में जानकारी हासिल करने में मदद करेगी और देश में वायरस के प्रसार के बारे में बहुत कुछ पता चलेगा। इससे बढ़कर यह कि दुबई की भौगोलिक स्थिति पूर्व और पश्चिम के बीच सेतु की है ऐसे में यह भी समझने में मदद मिलेगी कि कैसे यह महामारी पूरी दुनिया में फैली।
उल्लेखनीय है कि खलीज टाइम्स के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात में अबतक कोरोना वायरस से संक्रमण के करीब चार हजार मामले सामने आए हैं जिनमें से 25 लोगों की मौत हुई है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 15, 2020 08:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

