कोविड-19 के मरीज दो पुलिस कर्मियों ने अस्पताल पर लगाया उपेक्षा करने का आरोप
एक पुलिस कर्मी दिल्ली के तिलक विहार पुलिस चौकी में तैनात कांस्टेबल है जिसने एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया है कि नजफगढ़ स्थित एक अस्पताल की एक मंजिल पर लगभग बीस मरीजों का एक साथ उपचार किया जा रहा है और उन सभी के लिए एक ही शौचालय है।
नयी दिल्ली/लुधियाना, 21 अप्रैल दिल्ली और पंजाब के कोरोना वायरस से संक्रमित दो पुलिस कर्मियों ने शिकायत की है कि अस्पताल में उनका और अन्य मरीजों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है और वहां सफाई की उचित व्यवस्था भी नहीं है।
एक पुलिस कर्मी दिल्ली के तिलक विहार पुलिस चौकी में तैनात कांस्टेबल है जिसने एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया है कि नजफगढ़ स्थित एक अस्पताल की एक मंजिल पर लगभग बीस मरीजों का एक साथ उपचार किया जा रहा है और उन सभी के लिए एक ही शौचालय है।
कांस्टेबल का आरोप है कि किसी को गले में खराश या बुखार के लिए दवा भी नहीं दी जा रही है।
पुलिस कर्मी ने आरोप लगाया कि किसी को गरम पानी नहीं मिल रहा है और सोमवार से उनके बिस्तर की चादर भी बदली नहीं गई है।
कांस्टेबल का दावा है कि उन्हें गंदा तकिया दिया गया है और सेनिटाइजर भी उपलब्ध नहीं है।
तिलक विहार में दीन दयाल उपाध्याय स्वास्थ्य केंद्र में 17 अप्रैल को कांस्टेबल का परीक्षण हुआ था और उसमें कोरोना वायरस की पुष्टि 18 अप्रैल को हुई थी।
लुधियाना के 46 वर्षीय एक सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) ने भी पुलिस के उच्चाधिकारियों के सामने ऐसी ही एक शिकायत दर्ज कराई है जिसमें कहा गया है पुलिस कर्मी को जिन दो अस्पताल में भर्ती किया गया था वहां उसके साथ “अछूत” जैसा व्यवहार किया गया और मधुमेह से पीड़ित होने के बावजूद पूरे दिन उसे भोजन नहीं दिया गया और कोई डॉक्टर या नर्स उसकी जांच करने भी नहीं आया।
एएसआई ने कहा, “कोविड-19 मरीजों के लिए लुधियाना के दो सरकारी अस्पताल में कोई सुविधा नहीं दी गई है। डॉक्टरों और नर्सों द्वारा मरीजों की उपेक्षा की जा रही है। मरीजों को घटिया खाना दिया जा रहा है।”
एएसआई ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह मधुमेह का मरीज है और अस्पताल में कोविड-19 के मरीज के लिए उचित सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
एएसआई की शिकायत में कहा गया कि 17 अप्रैल की रात जब उसे एमसीएच अस्पताल में भर्ती किया गया तब कोई डॉक्टर या नर्स उसकी जांच करने नहीं आया।
एएसआई को 18 अप्रैल की रात को अस्पताल में पहली बार भोजन दिया गया।
अधिकारी का रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ने के बाद उसे 18 अप्रैल देर रात को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
एएसआई के अनुसार 19 अप्रैल को उसे नाश्ता तक नहीं दिया गया और ‘कोई डॉक्टर या नर्स उसके पास नहीं आया।’
एएसआई ने कहा कि सिविल अस्पताल के शौचालय की हालत बेहद खराब थी । अस्पताल में कुछ घंटे बिताना नरक के समान था।
इसके बाद लुधियाना पुलिस आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद एएसआई को निजी एसपीएस अस्पताल में रविवार को भर्ती कराया गया।
सहायक पुलिस आयुक्त (पूर्व) देविंदर चौधरी से संपर्क किए जाने पर उन्होंने बताया कि एएसआई से शिकायत प्राप्त होने के बाद उसे भोजन देने के लिए एक पुलिस कर्मी को भेजा गया।
चौधरी ने कहा, “पुलिस कर्मी रात दस बजे अस्पताल पहुंचा और 11 बजे तक अस्पताल का कोई भी कर्मचारी उसे खाना देने को तैयार नहीं हुआ। नोडल अधिकारी संयुक्त आयुक्त नवराज बरार से बात करने के बाद ही अस्पताल के कर्मचारी एएसआई को खाना देने के लिए तैयार हुए।”
उपायुक्त प्रदीप अग्रवाल ने इस मामले में सिविल सर्जन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
इस बीच लुधियाना के सिविल सर्जन डॉ राजेश बग्गा ने कहा, “मरीज को समय पर खाना नहीं दिया गया जो कि प्रशासन की जिम्मेदारी है। मैं लुधियाना के उपायुक्त को जल्दी ही जवाब भेजूंगा।”
दिल्ली पुलिस कांस्टेबल ने आरोप लगाया कि उसमें कोरोना वायरस की पुष्टि हुए चार दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक उसके बच्चों में संक्रमण की जांच नहीं की गई है।
वीडियो के द्वारा दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल ने अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई है और अनुरोध किया है कि उसे निजी अस्पताल में भर्ती किया जाए।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 21, 2020 11:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

