देश की खबरें | वियतनामी बच्चे को बचाने के लिए ‘बॉम्बे रक्त समूह’ वाले दो भारतीय हनोई पहुंचे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दुर्लभ ‘बॉम्बे रक्त समूह’ वाले मुंबई निवासी दो लोग 28 दिन के उस वियतनामी बच्चे की मदद के लिए विमान से हजारों किलोमीटर दूर हनोई गए, जो गंभीर रूप से बीमार था। उनके इस कदम की लोग तारीफ कर रहे हैं।

मुंबई, 20 फरवरी दुर्लभ ‘बॉम्बे रक्त समूह’ वाले मुंबई निवासी दो लोग 28 दिन के उस वियतनामी बच्चे की मदद के लिए विमान से हजारों किलोमीटर दूर हनोई गए, जो गंभीर रूप से बीमार था। उनके इस कदम की लोग तारीफ कर रहे हैं।

अधिकारियों ने सोमवार को कहा कि दोनों ने नवजात शिशु की मदद करने का संदेश मिलने के 24 घंटों के भीतर जवाब दिया और बिना समय बर्बाद किए दक्षिण पूर्व एशियाई देश में पहुंच गये।

हालांकि, इन दोनों रक्त दाताओं का खून ‘रिएक्टिविटी’ से जुड़ी समस्या के कारण इस्तेमाल नहीं किया जा सका, लेकिन इस नेक काम के लिए बच्चे के माता-पिता, अस्पताल और भारतीय दूतावास ने दोनों की बहुत तारीफ की है।

हनोई में रहने वाले भारतीय समुदाय ने दोनों के लिए ई-वीजा, हवाई टिकट, रक्त जांच और अन्य कागजी कार्य का बंदोबस्त मदद का संदेश मिलने के महज 24 घंटों के अंदर कर दिया था।

इस घटनाक्रम के बारे में बात करते हुए खून देने के लिए हनोई गए एक रक्तदाता प्रवीण शिंदे ने कहा कि उन्हें एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘थिंक टैंक’ से जुड़े विनय शेट्टी का फोन कॉल 15 फरवरी को करीब दोपहर 12 बजे प्राप्त हुआ।

शिंदे ने कहा कि उन्हें बताया गया कि हनोई के एक अस्पताल में भर्ती गंभीर रूप से बीमार बच्चे को दुर्लभ ‘बॉम्बे रक्त समूह’ की जरूरत है, जो कि खुद उनका रक्त समूह है।

उनकी रक्त संबंधी जांच एक घंटे के भीतर की गई, लेकिन वियतनामी कानून के तहत किसी दूसरे देश से वहां रक्त लाने की अनुमति नहीं है।

इस नीतिगत पाबंदी के कारण शिंदे और ‘बॉम्बे रक्त समूह’ वाले शहर के एक अन्य निवासी आशीष नलवाड़े को हवाई मार्ग से हनोई पहुंचने के लिए कहा गया।

शिंदे ने कहा कि इसके बाद दोनों लोगों की तस्वीरें और अन्य सूचनाएं अगले कुछ घंटों में एकत्र की गईं और उसी दिन अपराह्न साढ़े चार बजे तक उनके ई-वीजा और हवाई टिकट तैयार थे।

दोनों लोगों ने खून दिया, लेकिन रिएक्टिविटी संबंधी समस्या के कारण उनके खून का इस्तेमाल नहीं हो सका। शिंदे ने कहा कि सौभाग्य से अस्पताल को बॉम्बे रक्त समूह का एक स्थानीय व्यक्ति मिल गया, जिसका खून बच्चे को चढ़ाया गया।

बॉम्बे रक्त समूह की खोज वर्ष 1952 में हुई थी, जो एच एंटीजन की अनुपस्थिति और एंटी-एच एंटीबॉडी की उपस्थिति के कारण एक दुर्लभ रक्त समूह है। बॉम्बे रक्त समूह के लोगों को केवल इसी समूह के लोग खून दे सकते हैं।

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