देश की खबरें | सादिक जमाल कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में गुजरात पुलिस के दो कर्मी आरोपमुक्त

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 2003 के सादिक जमाल कथित फर्जी मुठभेड़ कांड के आरोपी दो पुलिसकर्मियों को मंगलवार को यह कहते हुए आरोप मुक्त कर दिया कि उनके खिलाफ मामले को आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार नहीं है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

अहमदाबाद, 24 नवंबर अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 2003 के सादिक जमाल कथित फर्जी मुठभेड़ कांड के आरोपी दो पुलिसकर्मियों को मंगलवार को यह कहते हुए आरोप मुक्त कर दिया कि उनके खिलाफ मामले को आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार नहीं है।

भावनगर निवासी सादिक 13 जनवरी, 2003 को शहर के बाहरी इलाके नरोदा में कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। पुलिस ने दावा किया था कि सादिक लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी था और वह गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एवं अन्य भाजपा नेताओं को मारने निकला था।

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विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी ए दवे ने उपनिरीक्षक आर एल मवानी और कांस्टेबल ए एस यादव की आरोप मुक्त करने की अर्जियां मंजूर कर लीं। न्यायाधीश ने कहा कि महज मुठभेड़ स्थल पर उनकी उपस्थिति, जैसा कि सीबीआई ने आरोप लगाया, और वह भी एक वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन करने की वजह से, सादिक की हत्या के लिए उन्हें आरोपित करने के लिए काफी नहीं है।

मवानी और यादव ने इस साल अगस्त में आरोप मुक्त करने के लिए अर्जियां देकर दावा किया था कि उनके विरूद्ध गलत तरीके से आरोप पत्र दायर किया गया है। सीबीआई ने उनपर मुठभेड़ टीम का हिस्सा होने का आरोप लगाया था।

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गुजरात उच्च न्यायालय ने 16 जून, 2011 को शहर की अपराध शाखा को उसकी (सादिक की) मौत के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था और फिर इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था।

दिसंबर, 2012 को दायर किये गये अपने आरोप पत्र में सीबीआई ने कहा था कि यह मुठभेड़ एक पूर्व नियोजित साजिश थी, जिसके तहत आरोपी पुलिसकर्मियों ने दो जनवरी, 2003 को अपने मुम्बई के समकक्षों से सादिक को अपनी हिरासत में लिया था, फिर उन्होंने उसे शाहीबाग में 13 जनवरी तक एक बंगले में बंधक बनाकर रखा एवं बाद में उसे मार डाला।

सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में मवानी और यादव के अलावा सेवानिवृत पुलिस उपाधीक्षक तरुण बारोट, जे जी परमार (सुनवाई के दौरान इनकी मौत हो गयी), के एम वाघेला, जी एच गोहिल, अजयपाल सिंह, चत्रसिंह चूड़ास्मा को भी आरोपी बनाया था।

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