नयी दिल्ली, 24 मई गत छह फरवरी को तुर्किये और सीरिया में आए भूकंपों का विश्लेषण करते हुए अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि सांख्यिकीय रूप से किसी एक भूकंप के झटके के बाद दोहरे भूकंप की आशंका लगभग सात प्रतिशत थी और इससे संकेत मिलता है कि यह व्यवहार असंगत नहीं था।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि दो बड़े भूकंपों का ‘दोहरे भूकंप’ के रूप में इतने आसपास आना असामान्य था, वहीं पहले मुख्य झटके ने संभवत: दूसरे भूकंप के केंद्र के क्षेत्र में तनाव पैदा किया जो पहले भूकंप के उत्तर में लगभग 90 किलोमीटर दूर सर्गु-मिसिस फॉल्ट जोन (एसएमएफजेड) में भूकंप का कारण बना।
दक्षिण-मध्य तुर्किये और उत्तर पश्चिम सीरिया में भूकंपों के प्रारंभिक आकलन वाले तीन अध्ययन ‘द सीस्मिक रिकॉर्ड’ में प्रकाशित किये गये हैं। इनमें इस तरह की जानकारी है कि कैसे, कहां और कितनी तेजी से भूकंप आये और किस तरह उन्होंने मिलकर ‘विनाशकारी दोहरे भूकंप’ के रूप में क्षेत्रों को थर्रा दिया।
हेल्महोल्ट्ज सेंटर पॉट्सडैम जीएफजेड जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस, जर्मनी के गेसा एम. पीटरसन के नेतृत्व में एक विश्लेषण में बताया गया कि पहला मुख्य झटका कुल 117 सेकंड की अवधि में कई चरणों में 560 किलोमीटर तक फैलता चला गया जबकि दूसरा भूकंप 32 सैकंड की अवधि में लगभग 115 किलोमीटर की दूरी तक आया। भूकंप के बाद के झटके एसएमएफजेड के करीब 160 किलोमीटर के क्षेत्र में आये।
दोनों भूकंपों में फैलाव अचानक रूक गया और शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर यह नहीं रूकता तो यह मजबूत भूकंपीय झटकों के फैलाव का कारण बन सकता था । इस अध्ययन में, अनुसंधानकर्ताओं ने प्रत्येक भूकंप के आने की दिशा का पता लगाया।
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