विदेश की खबरें | कार्यकर्ता की रिहाई के आह्वान के बाद तुर्की ने दस राजनयिकों को तलब किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. बयान से सरकारी अधिकारी क्षुब्ध हो गए जिन्होंने इन देशों पर तुर्की की न्यायपालिका में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।
बयान से सरकारी अधिकारी क्षुब्ध हो गए जिन्होंने इन देशों पर तुर्की की न्यायपालिका में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।
कवाला (64) को चार वर्षों से जेल में बंद रखा गया है जिन पर 2013 के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के माध्यम से तुर्की की सरकार को हटाने का प्रयास करने के आरोप लगे हैं। उन पर जासूसी करने और 2016 में सैन्य विद्रोह के माध्यम से सरकार को अपदस्थ करने के भी आरोप लगे हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि राजदूतों से कहा गया है कि ‘‘स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा चल रही कानूनी कार्यवाही के बारे में सोशल मीडिया के माध्यम से बयान जारी करना अस्वीकार्य है।’’
इसने कहा कि तुर्की ‘‘न्यायिक कार्यवाही के राजनीतिकरण और तुर्की की न्यायपालिका पर दबाव बनाने के प्रयास को खारिज करता है।’’
यूरोपीयन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने दिसंबर 2019 में केवाला की रिहाई का फैसला दिया लेकिन तुर्की के अधिकारियों ने फैसले की अनदेखी की है।
अमेरिका के साथ ही कनाडा, फ्रांस, फिनलैंड, डेनमार्क, जर्मनी, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नॉर्वे और स्वीडन के दूतावासों ने बयान जारी कर कहा कि केवाला के मामले में सुनवाई में विलंब, विभिन्न मामलों को एक साथ करना और पहले रिहाई के बावजूद नए मामले खोलने से ‘‘लोकतंत्र के सम्मान तथा कानून के शासन की पारदर्शिता पर ग्रहण लगा है।’’
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