पॉवेल ने अपनी लिखित टिप्पणी में कहा कि सीमा शुल्क और अर्थव्यवस्था एवं मुद्रास्फीति पर उसके प्रभाव ‘उम्मीद से कहीं अधिक’ हैं।
उन्होंने कहा कि आयात पर लगाए गए करों से मुद्रास्फीति में कम-से-कम अस्थायी वृद्धि होने की बहुत अधिक आशंका है, लेकिन प्रभाव अधिक स्थायी होने के भी आसार हैं।
फेडरल रिजर्व के प्रमुख ने वर्जीनिया के आर्लिंगटन में दिए गए अपने भाषण में कहा, “हमारा दायित्व है ... यह सुनिश्चित करना कि मूल्य स्तर में एक बार की वृद्धि एक स्थायी मुद्रास्फीति की समस्या न बन जाए।”
पॉवेल का मुद्रास्फीति पर ध्यान देना इस बात का संकेत है कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में अपनी प्रमुख ब्याज दर को लगभग 4.3 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखेगा।
ऐसा होने से अमेरिकी शेयर बाजार के निवेशक निराशा हो सकते हैं, जो अब इस साल ब्याज दरों में पांच कटौती की उम्मीद कर रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बुधवार को सीमा शुल्क लगाने की घोषणा के बाद से दर कटौती की संख्या बढ़ गई है।
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि सीमा शुल्क अर्थव्यवस्था को कमजोर करेंगे, संभवतः नई भर्तियों को खतरे में डालेंगे, और कीमतों को बढ़ाएंगे। ऐसा होने पर फेडरल रिजर्व अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ब्याज दरों में कटौती कर सकता है या मुद्रास्फीति से निपटने के लिए दरों को अपरिवर्तित या बढ़ोतरी भी कर सकता है।
हालांकि पॉवेल की इन टिप्पणियों से ऐसा लगता है कि फेडरल रिजर्व ज्यादातर मुद्रास्फीति पर ही ध्यान केंद्रित करेगा।
पॉवेल की यह टिप्पणी ट्रंप द्वारा कई देशों पर व्यापक सीमा शुल्क लगाने के दो दिन बाद आई है। इसके बाद अमेरिका और विदेशों में शेयर कीमतों में भारी गिरावट आई है।
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