देश की खबरें | त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने कम्युनिस्टों की आलोचना की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने शनिवार को वामपंथियों को ‘राजनीतिक व्यापारी’ करार देते हुए कहा कि वैसे तो उन्होंने इस पूर्वोत्तर राज्य पर 35 साल शासन किया लेकिन उन्हें संगठन का बहुत कम ज्ञान है।

अगरतला, नौ अप्रैल त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने शनिवार को वामपंथियों को ‘राजनीतिक व्यापारी’ करार देते हुए कहा कि वैसे तो उन्होंने इस पूर्वोत्तर राज्य पर 35 साल शासन किया लेकिन उन्हें संगठन का बहुत कम ज्ञान है।

देब ने एक कार्यक्रम में कहा कि कम्युनिस्ट पेशे के रूप में राजनीति को चुनते हैं । उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती वाममोर्चा सरकार लोगों का शोषण करती थी और इस संबंध में वह ब्रिटिशों से भी आगे निकल गयी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि कम्युनिस्टों के पास संगठनात्मक ज्ञान या कौशल होता तो वाममोर्चा को भाजपा सत्ता से नहीं उखाड़ पाती। मतदाताओं का ध्यान रखने के लिए जमीनी स्तर पर मतदान केंद्र वार ‘पन्ना प्रमुख नियुक्त करने की भाजपा की संगठनात्मक रणनीति के सामने उसने सही मायने में घुटने टेक दिये।’’

वाममोर्चा त्रिपुरा में 1978 से 1988 तक और फिर 1998 से 2018 तक शासन में थी। उसे 2018 में भाजपा ने हराया। अब राज्य में अगला विधानसभा चुनाव मार्च, 2023 में है।

देब ने कहा, ‘‘कम्युनिस्ट संगठन का बहुत कम ज्ञान रखने वाले राजनीतिक व्यापारी हैं और वे राजनीति को पेश के रूप में चुनते हैं। उन्होंने आठ साल तक सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति बाधित कर त्रिपुरा में गतिरोध पैदा किया था। भाजपा लोगों के लिए काम करती है..... त्रिपुरा में माकपा नीत वाममोर्चा ने उत्पीड़न में ब्रिटिश काल को भी पीछे छोड़ दिया क्योंकि उसने अपने कर्मियों एवं लोगों का शोषण किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं लोगों की मानसिकता नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बदलने की नयी अवधारणा पैदा करने के अपने तौर तरीके से राज्य को चला रहा हूं। ’’

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली त्रिपुरा यात्रा के दौरान उनके साथ अपने संवाद को याद करते हुए कहा, ‘‘मोदीजी ने मुझसे मेरी धारणा के बारे में पूछा था और मैंने उनसे कहा था कि भाजपा शासन में लोगों की मानसिकता में बदलाव आया है।’’

अपनी बात स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ त्रिपुरा में कम्युनिस्ट मानसिकता में करीब 65 प्रतिशत बदलाव आया है। इतने से छोटे कालखंड में मार्क्सवादी मानसिकता में पूर्ण बदलाव संभव नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह नहीं होते तो त्रिपुरा को ‘मजबूत मार्क्सवादी पकड़ से आजाद’ नहीं कराया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘ यह मोदी जी एवं शाह जी ही थे जिन्होंने त्रिपुरा में बदलाव लाया क्योंकि विपक्षी दल (कांग्रेस) तो माकपा का बी टीम बन गया था।’’

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