ताजा खबरें | जनजाति विधेयक चर्चा दो लोस

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वाईएसआरसीपी के डॉ संजीव कुमार ने आंध्र प्रदेश की चार जातियों को अनुसूचित जनजातियों में शामिल करने का आग्रह केंद्र से किया।

शिवसेना के राजेंद्र गावित ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां अनुसूचित जनजातियों में शामिल होने के लिए राज्यों से केंद्र को प्रस्ताव मिलते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में उच्चारण, प्रिंटिंग आदि का बहाना बनाकर लोग जनजातियों के फर्जी प्रमाणपत्र प्राप्त कर लेते हैं और नाम सदृश होने से गैरकानूनी तरीके से लाभ उठाना चाहते हैं।

गावित ने कहा कि ऐसे लोगों पर मामले दर्ज करके कार्रवाई होनी चाहिए।

बीजू जनता दल की शर्मिष्ठा सेठी ने कहा कि 1978 से ओडिशा समेत अनेक राज्यों के ऐसे अनेक प्रस्ताव लंबित हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इतने लंबे समय तक लंबित रखना ठीक नहीं है।

बहुजन समाज पार्टी की सदस्य संगीता आजाद ने विधेयक में कुछ संशोधनों की जरूरत बताते हुए इसका समर्थन किया। उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश में गौण समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का अनुरोध किया।

उन्होंने उत्तर प्रदेश में राजभर समुदाय को भी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से अनुसूचित जाति के दायरे में लाने का अनुरोध किया।

उन्होंने निजीकरण पर रोक लगाने और निजी क्षेत्र में भी आरक्षण देने की मांग की।

तेलंगाना राष्ट्र समिति के बी बी पाटिल ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के समुदायों को वित्तीय सहायता देना भी आवश्यक है, अन्यथा उनका विकास नहीं होगा। उन्होंने जातीय जनगणना करने की भी जरूरत बताई।

जदयू के आलोक कुमार सुमन ने भी अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण से जुड़े विषय उठाये ।

तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के सशक्तिकरण की जरूरत बतायी ।

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