जरुरी जानकारी | स्थानीय तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट का रुख
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात तीन प्रतिशत की गिरावट आने के बाद दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सोयाबीन तेल के दाम प्रभावित हुए और बाकी तेल- तिलहन कीमतों में भी गिरावट आई। सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ, बिनौला और पामोलीन तेल कीमतें हानि दर्शाती बंद हुईं। दूसरी ओर कारोबार कमजोर रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के भाव अपरिवर्तित रहे।
नयी दिल्ली, 29 दिसंबर शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात तीन प्रतिशत की गिरावट आने के बाद दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सोयाबीन तेल के दाम प्रभावित हुए और बाकी तेल- तिलहन कीमतों में भी गिरावट आई। सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ, बिनौला और पामोलीन तेल कीमतें हानि दर्शाती बंद हुईं। दूसरी ओर कारोबार कमजोर रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के भाव अपरिवर्तित रहे।
बाजार सूत्रों ने कहा कि शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात तीन प्रतिशत की गिरावट आई थी और आज यहां अधिक घट-बढ़ नहीं है। मलेशिया एक्सचेंज बेहद मामूली सुधार का रुख लिए लगभग पूर्ववत ही बंद हुआ। शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात तीन प्रतिशत की गिरावट का यहां के कारोबार पर बहुत कम असर हुआ और शिकॉगो में सोयाबीन डीगम की कीमत में आई तीन प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले यहां लगभग दो प्रतिशत की ही गिरावट आई।
सूत्रों ने कहा कि दूसरी ओर पामोलीन तेल का आयात अगली सूचना तक खोले जाने से भी गिरावट को बल मिला। सूत्रों ने आगाह किया कि इससे देश की पाम प्रसंस्करण तेल मिलें बंद होने की ओर बढ़ सकती हैं। उधर, मलेशिया ने कच्चे पाम तेल (सीपीओ) के मुकाबले पामोलीन तेल का निर्यात भाव 20 डॉलर प्रति टन कम कर दिया है ताकि पामोलीन का निर्यात बढ़े और मलेशिया की प्रसंस्करण मिलें पूरी क्षमता से काम करें। हमारे यहां पामतेल प्रसंस्करण मिलों का काम ठप पड़ने से लोगों के समक्ष रोजगार का संकट पैदा हो सकता है।
सूत्रों ने कहा कि तेल आयात की कोटा प्रणाली से न तो किसान, न ही तेल उद्योग, न उपभोक्ता और न ही सरकार को कोई फायदा मिलता दिख रहा है। सरकार को तो जो राजस्व आयात शुल्क से प्राप्त होता था, उसका भी सरकार को नुकसान है। थोक में भी सूरजमुखी और सोयाबीन तेल प्रीमियम वसूले जाने से उपभोक्ताओं को पहले से महंगा ही मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि बिनौला से हमें लगभग 80 प्रतिशत खल की प्राप्ति होती है और वायदा कारोबार में इनके भाव ऊंचे चल रहे हैं जिससे दूध उत्पादन की लागत बढ़ी है। पिछले साल दिसंबर के दिनों में कपास गांठ की आवक लगभग दो लाख गांठ की थी जो बुधवार को घटकर 1.13 लाख कपास गांठ रह गई है और आज यह आवक घटकर 1.05 लाख गांठ रह गई। सूत्रों ने कहा कि सरसों की जो अभी ही खपत नहीं हो रही है तो लगभग एक डेढ़ माह बाद आने वाला सरसों कहां खपेगा? यह काफी गंभीर समस्या की ओर इशारा कर रहा है और इस ओर तत्काल ध्यान देकर देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है।
सूत्रों ने कहा कि किसान भी कब तक अपना स्टॉक रख पायेंगे और अंतत: इन्हें बेचने को विवश होना पड़ सकता है। लेकिन यह सब देश के तेल-तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिहाज से अच्छा नहीं है। इस दिशा में तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिये।
बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 7,045-7,095 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,535-6,595 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,400 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,460-2,725 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 14,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,135-2,265 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,195-2,320 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,100 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,650 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,000 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,525-5,625 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,345-5,365 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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