देश की खबरें | ट्रेन दुर्घटना: रेलवे ने चालक की चूक से इनकार किया, साजिश के पहलू से जांच जारी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. रेलवे ने ओडिशा ट्रेन हादसे में रविवार को एक तरह से चालक की गलती और प्रणाली की खराबी की संभावना से इनकार किया तथा संभावित ‘तोड़फोड़’ और ‘इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग’ प्रणाली से छेड़छाड़ का संकेत दिया।
नयी दिल्ली, चार जून रेलवे ने ओडिशा ट्रेन हादसे में रविवार को एक तरह से चालक की गलती और प्रणाली की खराबी की संभावना से इनकार किया तथा संभावित ‘तोड़फोड़’ और ‘इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग’ प्रणाली से छेड़छाड़ का संकेत दिया।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘‘हमने ट्रेन हादसे से जुड़ी दुर्घटना की सीबीआई जांच की सिफारिश की है।’’ वहीं, अधिकारियों ने कहा कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की जांच जारी रहेगी।
वैष्णव ने कहा कि दुर्घटना के ‘‘असल कारण’’ का पता लगा लिया गया है और इस ‘‘आपराधिक कृत्य’’ के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है। बालासोर जिले में दुर्घटनास्थल पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह (हादसा) इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और प्वाइंट मशीन में किए गए बदलाव के कारण हुआ।’’
दिल्ली में, रेलवे के शीर्ष अधिकारियों ने ‘‘सिग्नल में व्यवधान’’ का संकेत दिया। रेलवे बोर्ड की परिचालन और व्यवसाय विकास मामलों की सदस्य जया वर्मा सिन्हा ने कहा, ‘‘किसी प्रकार के सिग्नलिंग व्यवधान की संभावना है...चाहे वह मैनुअल या आकस्मिक, टूट-फूट से संबंधित, रखरखाव की विफलता या मौसम संबंधी हो, सीआरएस जांच में इसका पता चलेगा।’’
उन्होंने बताया कि ‘प्वाइंट मशीन’ और इंटरलॉकिंग प्रणाली कैसे काम करती हैं। सिन्हा ने कहा कि प्रणाली ‘‘त्रुटि रहित’’ और ‘‘विफलता में भी सुरक्षित’’ (फेल सेफ) है। हालांकि, उन्होंने बाहरी हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया।
सिन्हा ने कहा, ‘‘इसे ‘फेल सेफ’ प्रणाली कहा जाता है, तो इसका मतलब है कि अगर यह फेल हो जाता है, तो सारे सिग्नल लाल हो जाएंगे और ट्रेन का सारा परिचालन बंद हो जाएगा। अब, जैसा कि मंत्री ने कहा कि सिग्नल प्रणाली में समस्या थी। हो सकता है कि किसी ने बिना केबल देखे कुछ खुदाई की हो। किसी भी मशीन के चलाने में विफलता का खतरा होता है।’’
सिन्हा ने विशेष निष्कर्षों पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम में ‘‘कोई त्रुटि नहीं’’ मिली है, लेकिन लापरवाही से इनकार नहीं किया जा सकता।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहचान जाहिर नहीं करने का अनुरोध करते हुए कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई)आधारित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली के ‘‘लॉजिक’’ के साथ इस तरह की छेड़छाड़ केवल ‘‘जानबूझकर’’ हो सकती है। उन्होंने प्रणाली में किसी खराबी की संभावना को खारिज किया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह अंदर या बाहर से छेड़छाड़ या तोड़फोड़ का मामला हो सकता है। हमने किसी भी चीज से इनकार नहीं किया है।’’
सिन्हा ने कहा कि टक्कर रोधी तकनीक कवच से भी कोरोमंडल एक्सप्रेस की रफ्तार और खड़ी मालगाड़ी से उसकी दूरी के कारण यह दुर्घटना नहीं टल सकती थी।
बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस और शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस तथा एक मालगाड़ी से जुड़ा यह भीषण हादसा शुक्रवार शाम लगभग सात बजे हुआ, जिसमें कम से कम 275 लोगों की मौत हो गई और करीब 1,175 यात्री घायल हो गए।
अधिकारियों ने रविवार को कोरोमंडल एक्सप्रेस के चालक को भी यह कहकर ‘क्लीन चिट’ दे दी कि उसके पास आगे बढ़ने के लिए हरी झंडी थी और वह स्वीकृत गति से अधिक रफ्तार में ट्रेन को नहीं चला रहा था।
हादसे से संबंधित एक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कहा गया कि कोरोमंडल एक्सप्रेस स्टेशन पर लूप लाइन में प्रवेश कर गई, जिस पर लौह अयस्क से लदी एक मालगाड़ी खड़ी थी। इस रिपोर्ट की एक प्रति ‘पीटीआई-’ के पास उपलब्ध है।
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