जरुरी जानकारी | उपग्रह संचार सेवाओं पर वार्षिक राजस्व का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क लगाने की ट्राई ने सिफारिश की

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नयी दिल्ली, नौ मई दूरसंचार नियामक ट्राई ने शुक्रवार को एलन मस्क की स्टारलिंक जैसे उपग्रह संचार सेवा प्रदाताओं पर वार्षिक राजस्व का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क लगाने की सिफारिश की।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार विभाग को दी गई अपनी अनुशंसा में कहा कि शहरी क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले सेवा प्रदाताओं को प्रति ग्राहक 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं के लिए इन कंपनियों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।

ट्राई ने सिफारिश की है कि उपग्रह ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम पांच साल के लिए आवंटित किया जाए, जिसे बाद में दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।

समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क भू-स्थैतिक कक्षा (जीएसओ) और गैर-भूस्थैतिक कक्षा (एनजीएसओ) में स्थित उपग्रहों के जरिये सेवाएं देने वाली दोनों तरह की उपग्रह संचार कंपनियों को देना होगा। न्यूनतम वार्षिक स्पेक्ट्रम शुल्क 3,500 रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज होगा।

एजीआर का उपयोग उस राजस्व की गणना करने के लिए किया जाता है, जिसे दूरसंचार कंपनियां स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और लाइसेंस शुल्क के रूप में सरकार के साथ साझा करती हैं।

ट्राई का यह सुझाव सेवा प्रदाता कंपनियों के अनुरोध से काफी अधिक है। मस्क की स्टारलिंक और अमेजन इंक की सहायक कंपनी कुइपर सिस्टम्स ने ट्राई के साथ परामर्श के दौरान स्पेक्ट्रम शुल्क को एजीआर के एक प्रतिशत से कम रखने और कोई अन्य शुल्क नहीं लगाने का आग्रह किया था।

ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने सिफारिशें जारी करते हुए कहा कि उपग्रह संचार सेवाएं उन वंचित क्षेत्रों में संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, जहां दूरसंचार नेटवर्क उपलब्ध नहीं हैं। इन सेवाओं की आपदाओं, बचाव और राहत कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

ट्राई ने कहा कि स्पेक्ट्रम शुल्क को कारोबारी सुगतमा को बढ़ाते हुए एजीआर के प्रतिशत के रूप में लगाया जाना चाहिए।

नियामक ने कहा, ''कुल मिलाकर स्पेक्ट्रम शुल्क स्पेक्ट्रम के आवंटन को कवर करने के लिए जरूरी प्रशासनिक लागतों से अधिक नहीं होना चाहिए। यह निवेश और नवाचार को भी सुविधाजनक बनाएगा।''

दूरसंचार विभाग (डीओटी) इन सिफारिशों पर कार्रवाई करेगा। यह उन्हें संशोधित कर सकता है या पूरी तरह स्वीकार कर सकता है और उन्हें मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल को भेज सकता है। एक बार मंजूरी मिलने के बाद, उपग्रह संचार कंपनियां लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती हैं।

अमेरिकी अरबपति मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को दो दिन पहले ही सेवा शुरू करने का आशय पत्र (एलओआई) दिया गया था। अब कंपनी को भारत में सेवाएं शुरू करने से पहले लाइसेंस हासिल करना होगा।

स्पेसएक्स ने भारत में स्टारलिंक की ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत के लिए पहले ही रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ समझौता कर लिया है।

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