देश की खबरें | उपासना स्थल अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीर्ष अदालत ने केंद्र से जवाब मांगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह उपासना स्थल अधिनियम-1991 के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करे।

नयी दिल्ली, नौ जनवरी उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह उपासना स्थल अधिनियम-1991 के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करे।

संबंधित कानून कहता है कि 15 अगस्त, 1947 को विद्यमान उपासना स्थलों का धार्मिक स्वरूप वैसा ही बना रहेगा, जैसा वह उस दिन विद्यमान था। यह किसी धार्मिक स्थल को फिर से हासिल करने या उसके स्वरूप में बदलाव के लिए वाद दायर करने पर रोक लगाता है। हालांकि, अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद प्रकरण को इससे अलग रखा गया था।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने केंद्र को उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 के कुछ प्रावधानों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब प्रस्तुत करने के लिए फरवरी के अंत तक का समय दिया।

कुछ हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जनहित याचिकाओं के माध्यम से कानून को चुनौती दिए जाने पर प्रारंभिक आपत्ति जताई और इसे एक गंभीर मुद्दा बताया।

सिब्बल ने कहा, "मुझे कुछ बिंदु बताने हैं। सबसे पहले, यह चुनौती जनहित याचिकाओं के माध्यम से दी गई है ... मैं समझ सकता हूं कि क्या संरचना के संबंध में कोई विवाद है। यह एक अधिनियम है, जिसके संबंध में राम जन्मभूमि मामले (अयोध्या फैसले) में कुछ टिप्पणियां की गई हैं।"

उन्होंने कहा कि इससे पहले कि अदालत मामले की अंतिम सुनवाई करे, उसे प्रारंभिक मुद्दों पर विचार करने की जरूरत है।

पीठ ने सिब्बल द्वारा उठाई गई आपत्ति का संज्ञान लिया और कहा कि वह फरवरी के अंत तक अंतिम सुनवाई के दौरान इसे ध्यान में रखेगी।

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि कानून को चुनौती दी गई है, न कि फैसले में अदालत द्वारा की गई किसी टिप्पणी के खिलाफ।

कानून के प्रावधानों के खिलाफ पूर्व राज्यसभा सदस्य सुब्रह्मण्यम स्वामी द्वारा दायर याचिका सहित छह याचिकाएं दायर की गई हैं।

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