देश की खबरें | चीनी शासन के अधीन तिब्बत नाजुक हालात में : निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्यों ने कहा

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कोलकाता, 19 अगस्त निर्वासित तिब्बती संसद के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को दावा किया कि चीनी शासन के तहत उनका देश गंभीर स्थिति में है।

यह दावा करते हुए कि लगातार तीसरे वर्ष ‘फ्रीडम हाउस’ की स्वतंत्रता सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत को दुनिया में सबसे कम स्वतंत्र देश के रूप में स्थान दिया गया है, प्रतिनिधिमंडल ने भारत सरकार से अपील की कि वह चीनी सरकार को तिब्बत-चीन संघर्ष को सुलझाने के लिए दलाई लामा के साथ बिना किसी पूर्व शर्त के फिर से बातचीत में शामिल होने का आह्वान करे।

यूडॉन औकात्सांग ने कहा, ‘‘तिब्बत में स्थिति सांस्कृतिक नरसंहार और तिब्बती पहचान के पूर्ण विनाश की हद तक खराब हो गई है।’’

यूडॉन के अलावा गेशी मोनलम थारचिन और ताशी धोंडुप तिब्बती मुद्दे को उजागर करने के लिए पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा का दौरा करने वाले प्रतिनिधिमंडल के सदस्य हैं।

यूडॉन ने कहा, ‘‘हम तिब्बत के लिए वास्तविक स्वायत्तता की तलाश कर रहे हैं, जहां तिब्बतियों को शिक्षा, विकास और पर्यावरण के मामले में सभी आंतरिक स्वायत्तता मिलेगी।’’

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने तिब्बत में बड़े पैमाने पर औपनिवेशिक बोर्डिंग स्कूलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

सांस्कृतिक नरसंहार का आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि हजारों तिब्बती बच्चों को उनकी तिब्बती पहचान मिटाने के लिए बोर्डिंग स्कूलों में ले जाया जा रहा है।

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