वृद्धि दर शून्य से ऊपर रखने के लिये तीन से पांच प्रतिशत अतिरिक्त सार्वजनिक खर्च की जरूरत: एनसीएईआर
संस्थान ‘नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लायड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर)’ ने वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही के लिये जारी अपनी पहली कोरोना वायरस रिपोर्ट में यह कहा है।
नयी दिल्ली, 17 मई अर्थशास्त्र के मामलों में शोध एवं परामर्श देने वाले एक सरकारी संस्थान का कहना है कि 2020-21 में आर्थिक वृद्धि दर शून्य से ऊपर बनाये रखने के लिये सरकार को तीन से पांच प्रतिशत अतिरिक्त सार्वजनिक खर्च करने की जरूरत है।
संस्थान ‘नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लायड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर)’ ने वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही के लिये जारी अपनी पहली कोरोना वायरस रिपोर्ट में यह कहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोनो वायरस महामारी और इसकी रोकथाम के लिये देश भर में करीब दो महीने से लागू लॉकडाउन के असर से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिये 12 मई को देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 10 प्रतिशत यानी 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की।
एनसीएईआर ने कहा, "अर्थव्यवस्था की तिमाही समीक्षा टीम द्वारा नीतिगत उपायों की विभिन्न मान्यताओं के आधार की गयी प्रायोगिक समीक्षा से पता चलता है कि 2020-21 में शून्य से ऊपर की हल्की आर्थिक वृद्धि दर के लिये भी तीन से पांच प्रतिशत अतिरिक्त सार्वजनिक व्यय की आवश्यकता होगी।"
संस्थान ने कहा कि बिना प्रोत्साहन की स्थिति में वित्त वर्ष 2020-21 में उद्योगों व सेवाओं में गिरावट आगामी दिसंबर में जा कर थमेगी। उसके बाद अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च2021) में इन दो क्षेत्रों की वृद्धि दर शून्य रहेगी।
बिना प्रोत्साहन के चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) एक साल पहले की तुलना में 26 प्रतिशत संकुचित हो जाएगा और सालना आधार पर संकुचन 13 प्रतिशत रहेगा।
रिपोर्ट में कहा गया कि यदि सार्वजनिक खर्च फरवरी में पेश बजट के हिसाब से रहा तो इस स्थिति में जीडीपी में 4.1 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।
यदि सरकार सार्वजनिक खर्च में एक प्रतिशत की वृद्धि करती है तो जीडीपी में 1.9 प्रतिशत की गिरावट रह सकती है।
इसी तरह यदि सार्वजनिक खर्च को तीन प्रतिशत बढ़ाया जाता है तो वृद्धि दर पूरे वित्त वर्ष के दौरान 1.2 प्रतिशत रह सकती है। यदि अतिरिक्त खर्च को और बढ़ाकर जीडीपी के पांच प्रतिशत के बराबर किया जाता है तो चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर 3.6 प्रतिशत रह सकती है।
देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है। इसे दो बार बढ़ाकर 17 मई तक किया जा चुका है। इससे आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई है तथा सरकार के राजस्व और व्यय करने की क्षमता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 17, 2020 08:29 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

