देश की खबरें | जातिगत जनगणना का विरोध करने वाले सामाजिक समानता, आनुपातिक प्रतिनिधित्व के विरोधी हैं: लालू
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पटना, नौ अक्टूबर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने सोमवार को जाति आधारित जनगणना के आलोचकों पर मानवता, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समानता तथा आनुपातिक प्रतिनिधित्व के खिलाफ होने का आरोप लगाया।
1990 के दशक की मंडल की राजनीति से उभरे बिहार के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री लालू ने सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी की।
बिहार में जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी किए जाने की पृष्ठभूमि में उन्होंने यह टिप्पणी की।
जातिगत जनगणना के आंकड़ों के अनुसार राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) की आबादी 63 प्रतिशत है।
राजद प्रमुख ने अपनी टिप्पणी में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर था।
प्रसाद ने दावा किया कि जातिगत सर्वेक्षण का विरोध करने वालों में “न्याय की रत्तीभर भी भावना नहीं है” और वे “जन्म से लेकर मृत्यु तक केवल और केवल जन्मजात जातीय श्रेष्ठता के आधार एवं दंभ पर दूसरों का हक खाकर अपनी कथित श्रेष्ठता को बरकरार रखना चाहते हैं।’’
उन्होंने कहा, “कैंसर का इलाज सिरदर्द की दवा खाने से नहीं होगा।”
राजद और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड दोनों ही ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा हैं। गठबंधन ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसमें कहा गया है कि अगर वह केंद्र की सत्ता में आया तो सभी जातियों की जनगणना कराएगा।
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