किसी रणनीतिक क्षेत्र में होंगी अधिकतम चार सरकारी कंपनियां, शेष क्षेत्रों में होगा निजीकरण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस महामारी तथा इसकी रोकथाम के लिये देश भर में लागू लॉकडाउन की मार से अर्थव्यवस्था को उबारने के 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की पांचवीं एवं अंतिम किस्त की रविवार को घोषणा की। उन्होंने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि ये केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) में सुधारों को आगे बढ़ाने की नयी सुसंगत सार्वजनिक उपक्रम नीति का हिस्सा होंगे।
नयी दिल्ली, 17 मई सरकार ने रविवार को कहा कि आने वाले समय में रणनीतिक क्षेत्रों में अधिकतम चार सरकारी कंपनियां ही रहेंगी। इनके अलावा शेष क्षेत्रों में सरकारी कंपनियों का अंतत निजीकरण किया जायेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस महामारी तथा इसकी रोकथाम के लिये देश भर में लागू लॉकडाउन की मार से अर्थव्यवस्था को उबारने के 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की पांचवीं एवं अंतिम किस्त की रविवार को घोषणा की। उन्होंने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि ये केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) में सुधारों को आगे बढ़ाने की नयी सुसंगत सार्वजनिक उपक्रम नीति का हिस्सा होंगे।
नयी नीति के तहत रणनीतिक क्षेत्रों की सूची जारी की जायेगी। अधिसूचित रणनीतिक क्षेत्रों में न्यूनतम एक और अधिकतम चार सरकारी कंपनियां होंगी। इनके अलावा अन्य कंपनियां निजी क्षेत्र की होंगी। शेष सभी क्षेत्रों में व्यवहार्यता के आधार पर सरकारी कंपनियों का निजीकरण किया जायेगा।
सीतारमण ने कहा, "हम एक पीएसई नीति की घोषणा करना चाहते हैं, जैसा कि आत्मनिर्भर भारत को एक सुसंगत नीति की आवश्यकता है। सभी क्षेत्रों को निजी कंपनियों के लिये भी खोला जायेगा।’’
उन्होंने कहा, "सरकारी कंपनियां चुनिंदा तय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी। हमें एक सुसंगत नीति की आवश्यकता है, क्योंकि कभी-कभी कुछ क्षेत्रों को टुकड़ों में खोला जाता है। अब हम उन क्षेत्रों को परिभाषित करेंगे... जहां उनकी उपस्थिति प्रभावपूर्ण ढंग से महसूस होगी।"
वित्त मंत्री ने कहा, "इसलिये सरकार एक नयी नीति की घोषणा करेगी, जो मोटे तौर पर रणनीतिक क्षेत्रों और अन्य क्षेत्रों को वर्गीकृत करेगी। ऐसे रणनीतिक क्षेत्र जिनमें सरकारी कंपनियां मौजूद रहेंगी, उन्हें अधिसूचित किया जायेगा। उन अधिसूचित क्षेत्रों में कम से कम एक सरकारी कंपनी रहेगी, जबकि निजी कंपनियों को भी उन क्षेत्रों में अवसर दिये जायेंगे।’’
जिन क्षेत्रों को रणनीतिक के रूप में अधिसूचित किया जायेगा, उनमें चार से अधिक सार्वजनिक उपक्रम नहीं होंगे। शेष सरकारी कंपनियों का या तो निजीकरण किया जायेगा या फिर उन्हें विलय के जरिये एक होल्डिंग कंपनी के तहत लाया जायेगा।
उन्होंने कहा, "या तो उनका (सरकारी कंपनियों का) विलय कर दिया जायेगा, या उन्हें इस तरह से एक साथ लाया जायेगा कि उनकी संख्या चार या इससे कम रहे। अत: उन अधिसूचित क्षेत्रों में छोटे सार्वजनिक उपक्रम नहीं रहेंगे। इससे प्रशासनिक लागत भी कम होगी।’’
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण की नीति से सरकार के विनिवेश कार्यक्रम को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
केंद्र ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 2.10 लाख करोड़ रुपये का बजट लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें सीपीएसई विनिवेश से 1.20 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 17, 2020 04:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

