जरुरी जानकारी | मुनाफे के लिये काम नहीं करने वाले अस्पतालों को दान पर 100 प्रतिशत आयकर की छूट हो: नीति आयोग
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. नीति आयोग ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जनहित को सर्वोपरि रखते हुये मुनाफे के लिये काम नहीं करने वाले (नॉट-फॉर-प्रॉफिट) अस्पतालों को दिये जाने वाले दान पर 100 प्रतिशत आयकर छूट और कम ब्याज दर पर कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है।
नयी दिल्ली, 29 जून नीति आयोग ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जनहित को सर्वोपरि रखते हुये मुनाफे के लिये काम नहीं करने वाले (नॉट-फॉर-प्रॉफिट) अस्पतालों को दिये जाने वाले दान पर 100 प्रतिशत आयकर छूट और कम ब्याज दर पर कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है।
आयोग ने मंगलवार को ‘नॉट-फॉर प्रॉफिट हॉस्पिटल मॉडल इन इंडिया’ विषय पर रिपोर्ट में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रबंधन, सरकारी सुविधाओं के परिचालन तथा पीएसयू अस्पतालों में उच्च प्रदर्शन करने वाले सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाले अस्पतालों को शामिल करने की वकालत की।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मान्यता प्राप्त मुनाफे के लिये काम नहीं करने वाले अस्पतालों को दान या परमार्थ कार्य पर आयकर छूट की सीमा को 50 से बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया जाना चाहिए। इससे अस्पतालों को अपनी जरूरत के लिए कोष मिल सकेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को जनहित में काम करने वाले ऐसे अस्पतालों को कम ब्याज दर पर कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराने के प्रावधान पर विचार करना चाहिए। इससे जरूरत के समय इन अस्पतालों के पास पर्याप्त नकदी प्रवाह सुनिश्चित हो सकेगा।
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि सरकारी योजना के लाभार्थियों के इलाज पर ऐसे अस्पतालों को भुगतान पाने में लंबा इंतजार करना पड़ता है। ‘‘यदि इन अस्पतालों को समय पर भुगतान जारी हो जाए, तो उन्हें अपने परिचालन के लिए समय पर कार्यशील पूंजी उपलब्ध हो सकेगी।’’
नीति आयोग ने सुपर-स्पेशियल्टीज को दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने को प्रोत्साहित करने को तंत्र विकसित करने की भी वकालत की। रिपोर्ट में नॉट-फॉर-प्रॉफिट अस्पतालों के प्रदर्शन का इंडेक्स बनाने पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा ऐसे अस्पतालों का राष्ट्रीय स्तर का पोर्टल या डायरेक्टरी बनाने का भी सुझाव दिया गया है।
इससे पहले नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने कहा कि निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में निवेश का स्तर काफी कम है, जिससे इस क्षेत्र का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
पॉल ने हालांकि, इसके साथ ही कहा कि सरकार द्वारा हाल में घोषित प्रोत्साहनों से देश के समक्ष इस स्थिति को बदलने का अवसर बना है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को छोटे कारोबारियों को सरकारी गारंटी पर 1.5 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र को अतिरिक्त कोष, पर्यटन एजेंसियों और गाइड को ऋण तथा वीजा शुल्क माफी जैसी घोषणाएं कीं।
सरकार कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर पैदा होने वाली किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों में विशेषतौर से बच्चों की चिकित्सा सुविधाओं, बिस्तरों आदि के लिए 23,220 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तपोषण उपलब्ध कराएगी।
पॉल ने ‘नॉट-फॉर प्रॉफिट हॉस्पिटल मॉडल इन इंडिया’ विषय पर रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, ‘‘निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के विस्तार के लिहाज से निवेश का स्तर काफी कम है। कल जिन प्रोत्साहनों की घोषणा की गई है उनसे हम इस स्थिति को बदल सकते हैं।’’
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस रिपोर्ट में ‘नॉट-फॉर प्रॉफिट अस्पतालों के परिचालन मॉडल की जानकारी दी गई है। इसमें ऐसे अस्पतालों पर शोध आधारित निष्कर्ष डाले गए है।
बयान में कहा गया है कि मुनाफे के लिए काम करने वाले स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बारे में पर्याप्त सूचना उपलब्ध है, लेकिन मुनाफा कमाने के लिये काम नहीं करने वाले एक प्रकार के निस्वार्थ सेवा देने वाले ‘नॉट फॉर प्रॉफिट’ अस्पतालों के बारे में विश्वसनीय सूचनाओं का अभाव है।
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