देश की खबरें | मनरेगा के तहत धनाभाव नहीं है और न ही भविष्य में होगा: गिरिराज सिंह
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नयी दिल्ली, तीन नवंबर ग्रामीण रोजगार गांरटी कार्यक्रम के तहत धनाभाव की खबरों का खंडन करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को कहा कि धनराशि की कोई कमी नहीं है और न ही भविष्य में होगी क्योंकि नरेंद्र मोदी सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कटिबद्ध है।
हाल में कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने महामारी के कारण काम को लेकर मांग बढ़ जाने के बाद भी महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत धनराशि की ‘बड़ी दिक्कत’ का मसला उठाते हुए कहा था कि आवंटित बजट का 90 फीसद हिस्सा इस्तेमाल हो चुका है जबकि इस वित्त वर्ष के पांच महीने अभी शेष हैं।
इसके बारे में संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के दौरान इस योजना के लिए धन आवंटन लगातार बढ़ रहा है और जब भी अतिरिक्त धनराशि की जरूरत होती है वित्त मंत्रालय से उसे प्रदान करने का अनुरोध किया जाता है।
पिछले वित्त वर्ष में केंद्र ने 61500 करोड़ के प्रारंभिक आवंटन को संशोधित कर 1.11 लाख करोड़ किया था।
सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ पूरी मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में कमियों को दूर कर एवं गांवों में परिसंपत्तियों के सृजन के लिए उनका इस्तेमाल कर उसे काफी सुधारा गया है। यह मांग आधारित कार्यक्रम है एवं कोई धनाभाव नहीं है और भविष्य में भी धन की कोई कमी नहीं होगी।’’
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कटिबद्ध है।
तमिलनाडु के मुख्मयंत्री द्वारा इस योजना के तहत और धनराशि मांगते हुए पत्र लिखे जाने के बारे में पूछे गये प्रश्न का उत्तर देते हुए सिंह ने कहा कि धनराशि का पहला हिस्सा अप्रैल में जारी किया गया था और दूसरा हिस्सा केवल तभी जारी किया जा सकता है जब राज्य पिछले वित्त वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट दे , जबकि तमिलनाडु ने ऐसा किया नहीं।
सिंह ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ राज्यों ने वित्तीय नियमों एवं विनियमों का पालन किये बिना ही कार्यक्रम के तहत केंद्र से धनराशि मांगी, ऐसे तौर तरीके से बचा जाना चाहिए।
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