देश की खबरें | भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ मौजूद नहीं : ऑल असम छात्र संघ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. ऑल असम छात्र संघ (आसू) ने सोमवार को आरोप लगाया कि ऐतिहासिक असम समझौते पर हस्ताक्षर के 37 साल बाद भी धुबरी जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा के एक बड़े हिस्से पर 'बाड़' (अवरोधक) नहीं लगी है।

धुबरी (असम), 22 अगस्त ऑल असम छात्र संघ (आसू) ने सोमवार को आरोप लगाया कि ऐतिहासिक असम समझौते पर हस्ताक्षर के 37 साल बाद भी धुबरी जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा के एक बड़े हिस्से पर 'बाड़' (अवरोधक) नहीं लगी है।

आसू के महासचिव शंकर ज्योति बरुआ के नेतृत्व में एक दल ने रविवार को जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा का दौरा किया। इस दौरान टीम ने वहां सीमा खुली होने को लेकर असंतोष व्यक्त किया।

बरुआ ने कहा, ''हम यह देखकर हैरान हैं कि गोलकगंज के पास बिन्नाचारा इलाके में गंगाधर नदी के साथ भारत और बांग्लादेश के बीच की सीमा पूरी तरह से खुली है।''

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार ने असम के लोगों से ''सीमा सील करने को लेकर झूठे वादे किये।’’

बरुआ ने कहा कि 1985 के ऐतिहासिक असम समझौते को 37 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन ''अब भी भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक प्रमुख खंड में बाड़ लगाने का काम अधूरा है।''

उन्होंने सरकार पर भारत-बांग्लादेश सीमा की रक्षा करने में दिलचस्पी नहीं रखने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि भारत-पाकिस्तान सीमा की तुलना में असम में बाड़ की गुणवत्ता ज्यादा खराब है।

बरुआ ने दावा किया कि आसू ने 40 साल पहले धुबरी जिले में खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा के परिणाम के बारे में अधिकारियों को चेतावनी दी थी और ''अब मुख्यमंत्री का भी कहना है कि राज्य में जिहादी गतिविधियां बढ़ गई हैं''।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि असम ''जिहादी गतिविधियों'' का केंद्र बन गया है।

छात्र नेता ने कहा, ''अगर केंद्र ने समय रहते सीमा को ठीक से सील कर दिया होता तो कट्टरपंथियों के खतरे नहीं होते।''

छात्रसंघ ने सरकार से खुली सीमा को बंद करने के लिए बेहतर वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करने की मांग की।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें