ताजा खबरें | पिछले दस साल से केंद्र की उपेक्षा के शिकार बिहार के लिए तत्काल विशेष राज्य के दर्जे की दरकार : राजद

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. आम बजट को ‘अमीरों का बजट’ करार देते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक सदस्य ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में बेरोजगारी का जिक्र ही नहीं है और पिछले दस साल से केंद्र की उपेक्षा के शिकार बिहार के लिए तत्काल विशेष राज्य के दर्जे की दरकार है।

नयी दिल्ली, 25 जुलाई आम बजट को ‘अमीरों का बजट’ करार देते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक सदस्य ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में बेरोजगारी का जिक्र ही नहीं है और पिछले दस साल से केंद्र की उपेक्षा के शिकार बिहार के लिए तत्काल विशेष राज्य के दर्जे की दरकार है।

उच्च सदन में आम बजट 2024-25 और जम्मू कश्मीर के बजट पर संयुक्त चर्चा में भाग लेते हुए राजद के संजय कुमार ने कहा कि हम दुनिया की पांचवे नंबर की अर्थव्यवस्था हैं लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में हम 197 देशों में से 142वें नंबर में हैं और हमारा स्थान अफ्रीकी देश अंगोला से भी नीचे है।

उन्होंने कहा कि देश में आय और संपत्ति का वितरण समान नहीं है। देश में शीर्ष एक प्रतिशत लोगों के पास देश की 40 प्रतिशत संपत्ति है और देश में शीर्ष दस प्रतिशत लोगों के पास देश की 70 फीसदी संपत्ति है।

मानव प्रगति और आर्थिक प्रगति को अलग अलग बताते हुए कुमार ने कहा ‘‘बजट में किसानों को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा केवल वादा ही रहा। उनकी फसल का उचित दाम उन्हें नहीं मिलता। एमएसपी के बारे में बजट में कुछ भी नहीं कहा गया है।’’

कुमार ने कहा कि बिहार को विशेष पैकेज के बारे में बहुत बातें हो रही हैं लेकिन सच यही है कि 25 पैसा कई बार ‘रीपैकेजिंग के बाद भी’ हमेशा 25 पैसा ही रहता है, किताब पर नया जिल्द चढ़ा देने से वह नयी किताब नहीं हो जाती है। बिहार के साथ यही होता है, केवल ‘रैपर’ बदलता है और कुछ नहीं।

उन्होंने कहा कि 2015 में प्रधानमंत्री ने बिहार के लिए एक लाख 25 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की थी। इसके अलावा अन्य विशेष निवेश के लिए 40 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इस बजट में राजमार्ग के लिए बिहार के राजमार्ग के लिए 26 हजार करोड़ आवंटित किए जबकि 2015 में 54713 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। उन्होंने सवाल किया ‘‘54,713 करोड़ रुपये का क्या हुआ? आप 26 हजार करोड़ रुपये दोबारा दे रहे हैं।’’

कुमार ने कहा ‘‘2015 में आपने राज्य में हवाई अड्डे के विकास के लिए 2700 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इस बजट में आप नए हवाई अड्डों की बात कर रहे हैं। 2015 में आपने रक्सौल के हवाई अड्डे के निर्माण और विकास के लिए 250 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। वहां आज तक नौ साल में एक ईंट भी नहीं लगी है। ’’

उन्होंने कहा कि 2015 के बजट में बिहार के बाका में अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए । इस बजट में बाका के पास भागलपुर में 21400 करोड़ रुपये थर्मल पावर प्लांट के लिए आवंटित किए गए हैं। नौ साल में जिला बदल गया, 20,000 करोड़ रुपये आज 21400 करोड़ रुपये हो गए लेकिन काम तो कुछ भी नहीं हुआ।’’

उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पुरानी है। ‘‘बिहार के संदर्भ में नीति आयोग की रिपोर्ट में सतत विकास के लक्ष्यों को पैमाना मानते हुए विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग मैं दोहराता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के संदर्भ में, नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार बिल्कुल पीछे है। नीति आयोग के अनुसार, सतत विकास लक्ष्य सूचकांक में राष्ट्रीय औसत 71 है जबकि बिहार का यह औसत 57 है। यह लगातार नीचे जा रहा है।’’

गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता में बिहार को सबसे पीछे बताते हुए कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में बिहार कहीं नजर नहीं आता।

उन्होंने कहा ‘‘स्थिति यह है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार पुल गिर रहे हैं। पिछले दस साल में राज्य को केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला है। सभी समस्याओं को देखते हुए बिहार को तत्काल विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही समय सीमा तय की जाए कि यह काम इस अवधि में पूरा होना ही चाहिए।’’

बेरोजगारी को बड़ी समस्या बताते हुए कुमार ने कहा कि बीते दस साल में बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत से बढ़ कर 9.2 हो गई है। उन्होंने कहा कि आज देश में बेरोजगारों में 83 फीसदी युवा हैं और हर दूसरा स्नातक बेरोजगार है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 17.5 फीसदी युवाओं के पास रोजगार है और शेष 83 फीसदी युवा बेरोजगार हैं।

उन्होंने कहा ‘‘ऐसा नहीं है कि बेरोजगारी दूर नहीं की जा सकती। बिहार में तेजस्वी मॉडल के तहत हमने 17 महीनों में महागठबंधन सरकार में दूर करके दिखाया है जब 4 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दीं और तीन लाख नौकरियां प्रक्रियाधीन करवाईं। फिर देश में ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता जबकि विभिन्न विभागों में पद रिक्त पड़े हैं।’’

कुमार ने कहा कि फल बेचने वालों को जब पूरी स्वतंत्रता नहीं है तो इसका मतलब यह है कि देश में लोकतंत्र नहीं है। ‘‘कुछ ही दूरी पर इंडिया गेट है जिसमें शहीद होने वालों में सबसे अधिक नाम मुसलमानों और सिखों के हैं। लोगों को धर्म के नाम पर बांटना सबसे बड़ा अधर्म है।’’

भाजपा की मेधा विश्राम कुलकर्णी ने मराठी में अपनी बात रखी।

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