चंडीगढ़, 17 फरवरी उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को सूक्ष्म उद्योगों के जरिये ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के पुनरोद्धार का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, ‘‘किसी गांव या गांवों के समूह में एक ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए, जहां खेतों में सूक्ष्म उद्योग हों और जो कृषि उपज में मूल्य जोड़ते हों, जो पशुधन और उत्पादित दूध में मूल्य जोड़ते हों। इससे एक स्थायी समाज विकसित करने में मदद मिलेगी।’’
धनखड़ ने कहा, ‘‘गांवों के समूहों में आइसक्रीम, पनीर, मिठाइयां और इसी तरह की चीजें बनाने के लिए उद्यमशीलता से हमें क्या रोकता है? ऐसा बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे रोजगार पैदा होगा और ग्रामीण युवा संतुष्ट होंगे।’’
उन्होंने मोहाली में राष्ट्रीय कृषि-खाद्य और जैव विनिर्माण संस्थान में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि दक्षता और उत्पादकता में सुधार के लिए कृषि पद्धतियों के साथ प्रौद्योगिकी को जोड़ना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्टार्टअप दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में हैं और उन्हें अब गांवों तक पहुंचना होगा, क्योंकि कृषि उपज अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है, उद्योगों के लिए कच्चा माल है।
उन्होंने किसानों से कहा कि वे प्रौद्योगिकी में प्रगति और इसके संभावित लाभ के बारे में जानकारी रखें।
उन्होंने कहा, ‘‘छोटे समूह बनाइए, अपने उत्पाद को अपनी पसंद की कीमत पर बेचिए। आप ऐसा कर सकते हैं।’’
धनखड़ ने कहा कि सरकार की कृषि नीतियां किसान की बहुत मदद कर रही हैं, और किसान को इस बारे में जानना होगा।
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