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जरुरी जानकारी | विदेशी बाजारो में तेजी से तेल-तिलहन कीमतों में सुधार का रुख

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सरसों तेल- तिलहन, सोयाबीन तेल, बिनौला, सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में मजबूती आई जबकि सामान्य कारोबार के दौरान मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

जरुरी जानकारी | विदेशी बाजारो में तेजी से तेल-तिलहन कीमतों में सुधार का रुख

नयी दिल्ली, दो जून विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सरसों तेल- तिलहन, सोयाबीन तेल, बिनौला, सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में मजबूती आई जबकि सामान्य कारोबार के दौरान मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

बाजार सूत्रों ने बताया कि मलेशिया एक्सचेंज में लगभग तीन प्रतिशत की तेजी थी जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में भी लगभग तीन प्रतिशत की तेजी है। मांग कम होने के बावजूद मलेशिया एक्सचेंज में तेजी से सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतें मजबूती के साथ बंद हुईं। स्टॉक खत्म होने की ओर है, ऐसे में मांग होने से बिनौला तेल में भी सुधार रहा। जबकि शिकॉगो एक्सचेंज के मजबूत होने की वजह से सोयाबीन तेल के भाव में सुधार रहा। सामान्य कारोबार के दौरान सोयाबीन दाना एवं लूज के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि आयातित तेलों की कमी को सरसों रिफाइंड तेल से पूरा करने की कवायद चल रही है और मंडियों में सरसों का स्टॉक आना भी निरंतर कम होता जा रहा है। इस हालत के मद्देनजर सरसों तेल-तिलहन के भाव भी मजबूत बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि लगभग 65 प्रतिशत जरूरत के लिए आयात पर निर्भरता के अलावा एक बड़ी समस्या खाद्य तेलों में हाल के दिनों में भारी उछाल की है जिसकी जड़ में खुदरा कारोबारियों द्वारा अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की आड़ में उपभोक्ताओं से थोक बिक्री मूल्य के मुकाबले 50-70 रुपये की अधिक कीमत वसूला जाना है। सारी समस्या की जड़ फिलहाल एमआरपी है और इसकी आड़ में हो रहे गोरखधंधे को जब तक रोकने की व्यवस्था नहीं जायेगी, सरकार के शुल्क कम करने या आयात बढ़ाने जैसे उपाय अपेक्षित परिणाम नहीं दे पायेंगे।

सूत्रों ने कहा कि खुदरा कारोबार में मॉल या अन्य फुटकर विक्रेताओं के यहां बिकने वाले खाद्य तेलों के एमआरपी की निगरानी के लिए सरकार को एक विशेष दस्ता बनाने जैसे उपायों पर विचार करना चाहिये ताकि खाद्य तेलों की थोक कीमत में निरंतर आ रही गिरावट का लाभ आम उपभोक्ताओं को भी मिल सके जिन्हें सरसों तेल 200-210 रुपये लीटर बेचा जा रहा है जबकि यह उन्हें 155-158 रुपये लीटर के भाव मिलना चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि संभवत: इन्हीं कारणों से अबतक देश तिलहन उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है। सरकार को इसके लिए जरूरी इंतजाम करने के बारे में सोचना होगा।

बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 7,365-7,415 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,710 - 6,845 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,950 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड तेल 2,660 - 2,850 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,325-2,405 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,365-2,475 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 17,000-18,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 16,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,550 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 14,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 14,400 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 14,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,850 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 14,700 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 6,750-6,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 6,450- 6,550 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का) 4,000 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 02, 2022 08:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).