देश की खबरें | सांसद फैजल की सजा के निलंबन के खिलाफ याचिका पर 22 अगस्त को सुनवाई करेगी शीर्ष अदालत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने हत्या के प्रयास के एक मामले में केरल उच्च न्यायालय द्वारा लोकसभा सदस्य मोहम्मद फैजल की दोषसिद्धि और सजा को निलंबित किए जाने के खिलाफ लक्षद्वीप प्रशासन की याचिका पर अंतिम सुनवाई के लिए सोमवार को 22 अगस्त की तारीख तय की।

नयी दिल्ली, 17 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने हत्या के प्रयास के एक मामले में केरल उच्च न्यायालय द्वारा लोकसभा सदस्य मोहम्मद फैजल की दोषसिद्धि और सजा को निलंबित किए जाने के खिलाफ लक्षद्वीप प्रशासन की याचिका पर अंतिम सुनवाई के लिए सोमवार को 22 अगस्त की तारीख तय की।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने शुरू में कहा कि उच्च न्यायालय के रिकॉर्ड से ऐसा प्रतीत होता है कि "सभी प्रासंगिक तथ्यों" पर उचित विचार नहीं किया गया और अधिक ध्यान उनकी अयोग्यता के चलते उपचुनाव संबंधी घटनाक्रम पर था।

फैज़ल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि इसी तरह के मामलों में शीर्ष अदालत के कई फैसले हैं और सजा के निलंबन के लिए निर्धारित मापदंडों में चुनाव भी शामिल है।

पीठ ने सिंघवी से कहा, "हमने पूरे रिकॉर्ड का अध्ययन किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि सभी प्रासंगिक कारकों पर उचित विचार नहीं किया गया। उच्च न्यायालय को इसकी दोबारा पड़ताल करनी चाहिए।"

केंद्रशासित प्रशासन की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि अगर मामले को वापस उच्च न्यायालय में भेजा जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

शिकायतकर्ता पदनाथ मोहम्मद सालिह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अगर मामला उचित विचार के लिए उच्च न्यायालय को वापस भेजा जाता है तो उन्हें भी कोई आपत्ति नहीं है। सालिह पर 2009 में फैज़ल ने हमला किया था।

हालांकि, सिंघवी ने कहा कि यह उचित होगा कि याचिका पर अंतिम फैसले के लिए शीर्ष अदालत सुनवाई करे।

इसके बाद पीठ ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 22 अगस्त की तारीख तय की।

ग्यारह जनवरी, 2023 को फैज़ल और तीन अन्य को 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिवंगत केंद्रीय मंत्री पीएम सईद के दामाद मोहम्मद सालिह की हत्या के प्रयास के मामले में केरल के कवरत्ती की एक सत्र अदालत ने 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और प्रत्येक पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

फैज़ल ने आदेश के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय का रुख किया था और उच्च न्यायालय ने 25 जनवरी को उनकी दोषसिद्धि और सजा को निलंबित कर दिया था।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि वह निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपील का निपटारा होने तक राकांपा नेता की दोषसिद्धि और सजा को निलंबित कर रहा है। इसने कहा था कि ऐसा न करने पर खाली होने वाली सीट पर दोबारा चुनाव होगा, जिससे सरकार और जनता पर वित्तीय बोझ पड़ेगा।

लक्षद्वीप प्रशासन ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया और 30 जनवरी को शीर्ष अदालत याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई।

अपनी याचिका में, लक्षद्वीप प्रशासन ने कहा कि उच्च न्यायालय ने फैज़ल की दोषसिद्धि और सजा को निलंबित करके गलती की है।

शीर्ष अदालत ने 29 मार्च को उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उनकी सदस्यता बहाल करने की लोकसभा सचिवालय की अधिसूचना के मद्देनजर संसद सदस्य के रूप में उनकी अयोग्यता के खिलाफ फैज़ल की अलग याचिका का निपटारा कर दिया था।

तेरह जनवरी को लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, फैज़ल को कवरत्ती में सत्र अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने की तारीख 11 जनवरी से लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

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